कृतिका (Kritika-Textbook)-Prose (CBSE Class-10 Hindi): Questions 394 - 409 of 461

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

मूर्तिकार ने सुना और जवाब दिया, ”नाक लग जाएगी। पर मुझे यह मालूम होना चाहिए कि यह लाट कब और कहाँ बनी थी। इस लाट के लिए पत्थर कहाँ से लाया गया था? ”

सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ़ ताका…. एक की नज़र ने दूसरे से कहा कि यह बताने की जिम्मेदारी तुम्हारी है। खैर मसला हल हुआ। एक र्क्लक को फोन किया गया और इस बात की पूरी छानबीन करने का काम सौंपा गया।… पुरातत्व विभाग की फाइलों के पेट चीरे गए पर कुछ पता नहीं चला। र्क्लक ने लौटकर कमेटी के सामने काँपते हुए बयान किया, ”सर मेरी खता माफ़ हो, फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं।”

Question number: 394 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

Short Answer Question▾

Write in Short

मूर्तिकार ने आवाज सुनकर क्या जबाव दिया?

Passage

लेकिन मूर्तिकार पैसे से लाचार था…. यानी हार मानने वाला कलाकार नहीं था। एक हैरतअंगेज खयाल उसके दिमाग में कौंधा और उसने पहली शर्त दोहराई। जिस कमरे में कमेटी बैठी हुई थी उसके दरवाजे फिर बंद हुए और मूर्तिकार ने अपनी नयी योजना पेश की, ”चूँकि नाक लगना एकदम ज़रूरी है, इसलिए मेरी राय है कि चालीस करोड़ में से कोई एक जिंदा नाक काटकर लगा दी जाए…. ”

बात के साथ ही सन्नाटा छा गया। कुछ मिनटों की खामोशी के बाद सभापति ने सबकी तरफ़ देखा। सबको परेशान देखकर मूर्तिकार कुछ अचकचाया (चौंक उठना, भौंचक्का होना) और धीरे से बोला, ”आप लोग क्यों घबराते हैं! यह काम मेरे ऊपर छोड़ दीजिए…. . नाक चुनना मेरा काम है, आपकी सिर्फ़ इजाज़त चाहिए।”

कानाफूसी हुई और मूर्तिकार को इजाज़त दे दी गई।

Question number: 395 (1 of 1 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

Short Answer Question▾

Write in Short

अंत में मूर्तिकार के दिमाग में क्या हैरतअंगेज खयाल आया?

Passage

मैं कुछ पूछती कि वह फिर चाले हो गया, ”मैडम यूमथांग भी पहले टूरिस्ट स्पॉट नहीं था। यह तो सिक्किम जब भारत में मिला उसके भी कई वर्षो बाद भारतीय आर्मी के कप्तान शेखर दत्ता के दिमाग में आया कि यहाँ सिर्फ़ फ़ौजियों को रखकर क्या होगा, घाटियों के बीच रास्ते निकालकर इसे टूरिस्ट स्पॉट बनाया जा सकता है। आप देखिए, अभी भी रास्ते बन रहे हैं।”

’हाँ, रास्ते अभी भी बन रहे हैं। नए-नए स्थानों की खोज अभी भी जारी है। शायद मनुष्य की इसी असमाप्त खोज का नाम सौंदर्य है’…. मन-ही-मन मैं कहती हूँ।

जीप आगे बढ़ने लगती है।

Question number: 396 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » साना-साना हाथ जोड़ि

Short Answer Question▾

Write in Short

किन-किन स्थानों की खोज जारी है?

Question number: 397 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » साना-साना हाथ जोड़ि

Short Answer Question▾

Write in Short

यूमथांग टूरिस्ट स्पॉट कब बना था?

Passage

तो हिरोशिमा में सब देखकर भी तत्काल कुछ लिखा नहीं, क्योंकि इसी प्रत्यक्ष अनुभूति की कसर थी। फिर एक दिन वहीं सड़क पर घूमते हुए देखा कि एक जले हुए पत्थर पर एक लंबी उजली छाया है-विस्फोट के समय वहाँ कोई खड़ा रहा होगा और विस्फोट से बिखरे हुए रेडियम-धर्मी पदार्थ की किरणें उसमें रुद्ध (बंद हो गई, फँस गई) हो गई होंगी। जो आस-पास से आगे बढ़ गई उन्होंने पत्थर को झुलसा दिया, जो उस व्यक्ति पर अटकीं उन्होंने उसे भाप बनाकर उड़ा दिया होगा। इस प्रकार सूमूची ट्रेजडी जैसे पत्थर पर लिखी गई।

Question number: 398 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » मैं क्यों लिखता हूँ?

Short Answer Question▾

Write in Short

लेखक ने यह सब देखकर भी तत्काल कुछ क्यों नहीं लिखा?

Question number: 399 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » मैं क्यों लिखता हूँ?

Short Answer Question▾

Write in Short

पत्थर पर क्या लिखा था?

Passage

दरअसल मंत्रमुग्ध-सी मैं तंद्रिल अवस्था में ही थोड़ी दूर तक निकल आई थी कि अचानक पाँवों पर ब्रेक सी लगी…. जैसे समाधिस्थ भाव में नृत्य करती किसी आत्मलीन नृत्यांगना के नुपूर अचानक टूट गए हों। मैंने देखा इस अदव्तीय सौंदर्य से निरपेक्ष कुछ पहाड़ी औरतें पत्थरों पर बैठीं पत्थर तोड़ रही थीं। गुँथे आटे-सी कोमल काया पर हाथों में कुदाल और हथौड़े! कईयों की पीठ पर बँधी डोको (बड़ी टोकरी) में उनके बच्चे भी बँधे हुए थे। कुछ कुदाल को भरपूर ताकत के साथ ज़मीन पर मार रही थीं।

Question number: 400 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » साना-साना हाथ जोड़ि

Short Answer Question▾

Write in Short

वहाँ की पहाड़ी औरते व बच्चे क्या कर रहे थे?

Question number: 401 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » साना-साना हाथ जोड़ि

Short Answer Question▾

Write in Short

लेखिका को तंद्रिल अवस्था के बाद क्या हुआ?

Passage

फेंकू सरदार की चौड़ी और पुष्ठ पीठ पर शपाशप झाडू झाड़ती तथा उसके पीछे-पीछे धमाधम सीढ़ी उतरती दुलारी चिल्लाई, ”निकल-निकल, अब मेरी देहरी डाँका (लाँघना) ं तो तेरी दाँत से नाक काट लूँगी।”

उत्कट क्रोध से दुलारी के नथने फूल गए थे, अधर फड़क रहा था, आँखों से ज्वाला-सी निकल रही थी। फेंकू के गली में निकलते ही दरवाजा बंद कर लिया। उधर पुलिस रिपोर्टर से आँखे चार होते ही झेंपने के बावजूद लाचार-सा होकर फेंकू उसकी ओर बढ़ा और इधर धीरे-धीरे दुलारी आँगन में लौटी। आँगन में खड़ी उसकी संगनियों और पड़ोसिनों ने उसकी ओर कुतूहल-भरी दृष्टि से देखा, परंतु दुलारी ने उनकी ओर आँख तक न उठाई। सीढ़ी चढ़कर उपेक्षा से झाडू अपनी कोठरी के दव्ार पर फेंकती हुई वह अपनी कोठरी जा घुसी। चूल्हे पर बटलोही में दाल चुर रही थी। उसने पैर की एक ठोकर से बटलोही उलट दी। सारी दाल चूल्हे में जा गिरी। आग बुझ गई।

Question number: 402 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

फेंकू के दरवाजे से बाहर निकलते ही कौन मिला?

Question number: 403 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

दुलारी को संगनियों और पड़ोसिनों ने किस दृष्टि से देखा?

Question number: 404 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

जुलूस के निकल जाने के बाद दुलारी ने फेंकू के साथ क्या किया?

Passage

दुलारी फेंकू को उत्तर देना ही चाहती थी कि जलाने के लिए विदेशी वस्त्रों का संग्रह करता हुआ देश के दीवानों का दल भैरवनाथ की सँकरी गली में घुसा और ’भारतजननि तेरी जय, तेरी जय हो’ गीत ध्वनि से उभय पार्श्व (दोनों तरफ) खड़ी इमारतों की प्रत्येक कोठरी में गूँज गई। एक बड़ी सी चादर फेलाकर चार व्यक्तियों ने उसके चारों कोनों को मजबूती से पकड़ रखा था। उसी पर खिड़िकियों से धोती, साड़ी, कमीज, कुरता, टोपी आदि की वर्षा हो रही थी।

Question number: 405 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

दुलारी ने क्या किया?

Question number: 406 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

कौनसे गाने की ध्वनि दोनों तरफ खड़ी इमारतों की प्रत्येक कोठरी में गूँज गई।

Question number: 407 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

उन इमारतों खिड़िकियों से क्या वर्षा हो रही है।

Question number: 408 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

विदेशी वस्त्रों का संग्रह करता हुआ देश के दीवानों का दल कौनसी गली में घुसा?

Question number: 409 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

Short Answer Question▾

Write in Short

फेंकू ने क्या जवाब दिया?

f Page
Sign In