कृतिका (Kritika-Textbook)-Prose (CBSE Class-10 Hindi): Questions 18 - 34 of 461

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग (एक तरह का वाद्य यंत्र)

जहाँ बुढडों का संग, तहाँ खरचे का तंग

हमारे पिता तड़के (प्रभात, सवेरा) उठकर, निबट-नहाकर पूजा करने बैठ जाते थे। हम बचपन से ही उनके अंग लग गए थे। माता से केवल दूध पीने तक का नाता था। इसलिए पिता के साथ ही हम भी बाहर की बैठक में ही सोया करते। वह अपने साथ ही हमें भी उठाते और साथ ही नहला-धुलाकर पूजा पर बिठा लेते। हम भभूत का तिलक लगा देने के लिए उनको दिक करने लगते थे। कुछ हँसकर, कुछ झुँझलाकर और कुछ डाँटकर वह हमारे चौड़े लिलार (ललाट) में त्रिपुंड (एक प्रकार का तिलक जिसमें ललाट पर तीन आड़ी या अर्धचंद्राकार रेखाएँ बनाई जाती हैं) कर देते थे। हमारे लिलार में भभूत खूब खुलती थी। सिर में लंबी-लंबी जटाएँ थीं। भभूत रमाने से हम खासे ’बम-भोला’ बन जाते थे।

Question number: 18 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चे भभूत रमाने से क्या बन जाते थे?

Question number: 19 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

माता से बच्चें का कैसा नाता था?

Question number: 20 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

पिता जी के साथ पूजा में कौन बैठता था?

Passage

उनके साथ हँसते-हँसते जब हम घर आते तब उनके साथ ही हम भी चौके पर खाने बैठते थे। वह हमें ही हाथ से, फूल के एक कटोरे में गोरस और भात सानकर (मिलाना, लपेटना, गूँधना) खिलाते थे। जब हम खाकर अफर (भर पेट से अधिक खा लेना) जाते तब मइयाँ थोड़ा और खिलाने के लिए हठ करती थी। वह बाबू जी कहने लगती-आप तो चार-चार दाने के कौर बच्चे के मुँह में देते जाते हैं; इससे वह थोड़ा खाने पर भी समझ लेता है कि हम बहुत खा गए; आप खिलाने का ढंग नहीं जानते-बच्चे को भर-मुँह कौर खिलाना चाहिए।

जब खाएगा बड़े-बड़े कौर, तब पाएगा दुनिया में ठौर (स्थान, अवसर) ।

-देखिए, मैं खिलाती हूँ। मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलाना चाहिए, और महतारी (माता) के हाथ से खाने पर बच्चों का पेट भी भरता है।

Question number: 21 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

महतारी (माता) के हाथ से खाने पर क्या होता है?

Question number: 22 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

हतारी का अर्थ क्या होता हैं?

Question number: 23 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

अफर क्या हैं?

Question number: 24 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

पिताजी खाने में बच्चों को क्या खिलाते थें?

Question number: 25 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मइयाँ पिता जी से क्या कहती हैं?

Question number: 26 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मइयाँ के अनुसार बड़े-बड़े कौर खाने से क्या होता हैं?

Passage

फिर क्या था, हमारा रोना-धोना भूल गया। हम हठ करके बाबू जी गोद से उतर पड़े और लड़कों की मंडली में मिलकर लगे वही तान-सुर अलापने। तब तक सब लड़के सामनेवाले मकई के खेत में दौड़ पड़े। उसमें चिड़ियों का झुंड चर रहा था। वे दौड़-दौड़कर उन्हें पकड़ने लगे, पर एक भी हाथ न आई। हम खेत से अलग ही खड़े होकर गा रहे थे-

’राम जी की चिरई, राम जी का खेत, खा लो चिरई, भर-भर पेट।

हमसे कुछ दूर बाबू जी और हमारे गाँव के कई आदमी खड़े होकर तमाशा देख रहे थे और यही कहकर हँसते थे कि ’चिड़िया की जान जाए, लड़कों का खिलौना’ । सचमुच ’लड़के और बंदर पराई पीर नहीं समझते।’

एक टीले पर जाकर हम लोग चूहों के बिल से पानी उलीचने लगे। नीचे से ऊपर पानी फेंकना था। हम सब थक गए। तब तक गणेश जी के चूहे के रक्षा के लिए शिव जी का साँप निकल आया था। रोते-चिल्लाते हम लोग बेतहाशा भाग चले! कोई औंधा गिरा, कोई अंटाचिट। किसी का सिर फूटा, किसी के दाँत टूटे। सभी गिरते-पड़ते भागे। हमारी सारी देह लहूलुहान हो गई। पैंरों के तलवे काँटों से छलनी हो गए।

Question number: 27 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाबू जी व गाँव वाले तमाशा देखकर क्या कहकर हँसते थे?

Question number: 28 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मकई के खेत में बच्चे कौनसा गाना गा रहे थे?

Question number: 29 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

साँप को देखकर बच्चों का क्या हुआ?

Question number: 30 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

टीले में जाकर बच्चे क्या करने लगे?

Question number: 31 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

टीले पर चूहे के बिल से क्या निकल आया था?

Passage

बाहर आते ही हमारी बाट जोहनेवाला बालकों का एक झुंड मिल जाता था। हम उन खेल के साथियों को देखते ही, सिसकना भूलकर, बाबू जी की गोद से उतर पड़ते और अपने हमजोलियों के दल में मिलकर तमाशे करने लग जाते थे।

Question number: 32 (1 of 1 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाहर आते ही किसका झुंड मिल जाता था?

Passage

जब कभी मइयाँ हमें अचानक पकड़ पाती तब हमारे लाख छटपटाने पर भी एक चुल्लू कड़वा लेत (सरसो का तेल) हमारे सिर पर डाल ही देती थी। हम रोने लगते और बाबू जी उस पर बिगड़ खड़े होते; पर वह हमारे सिर में तेल बोथकर (सराबोर कर देना) हमें उबटकर ही छोड़ती थी। फिर हमारी नाभी और लिलार में काजल की बिंदी लगाकर चोटी गूँथती और उसमें फूलदार लट्टू बाँधकर रंगीन कुरता-टोपी पहना देती थी। हम खासे ’कन्हैया’ बनकर बाबू जी की गोद में सिसकते-सिसकते बाहर आते थे।

Question number: 33 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मइयाँ बच्चों को कैसे तैयार करती थी?

Question number: 34 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चों को अचानक पकड़ने पर मइयाँ क्या करती थी?

Sign In