कृतिका (Kritika-Textbook)-Prose (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 253 - 270 of 461

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Passage

लायुंग की सुबह! बेहद शांत और सुरम्य। तिस्ता नदी की धारा के समान ही कल-कल कर बहती हुई। अधिकतर लोगों की जीविका का साधन पहाड़ी आलू, धान की खेती और दारू का व्यापार। सुबह मैं अकेले ही टहलने निकल गई थी। मैंने उम्मीद की थी कि यहाँ मुझे बर्फ़ मिलेगी पर अप्रैल के शुरुआती महीने में यहाँ बर्फ़ का एक कतरा भी नहीं था। यद्यपि हम सी लेवल (तल, स्तर) से 14000 फीट की ऊँचाई पर थे। मैं बर्फ़ देखने के लिए बैचेन थी…हम मैदानों से आए लोगों के लिए बर्फ़ से ढके पहाड़ किसी जन्नत से कम नहीं होते।

Question number: 253 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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लायुंग की सुबह कैसी थी?

Passage

उसका चित्त आज चंचल हो उठा था। अपने प्रति टुन्नू के हृदय की दुर्बलता का अनुभव उसने पहली ही मुलाकात में कर लिया था। परंतु उसने उसे भावना की एक लहर-मात्र माना था। बीच में भी टुन्नू उसके पास कई बार आया कोई विशेष बातचीत नहीं हुई। कारण, टुन्नू आता, घंटे-आध घंटे दुलारी के सामने बैठा रहता, पूछने पर भी हृदय की कामना प्रकट न करता। केवल अत्यंत मनोयोग से दुलारी की बातें सुनता और फिर धीरे से छाया की तरह खिसक जाता। यौवन के अस्ताचल पर खड़ी दुलारी टुन्नू के इस उन्माद पर मन-ही-मन हँसती। परंतु आज उसे कृशकाय और कच्ची उमर के पाँडुमुख बालक टुन्नू पर करूणा हो आई। अब दुलारी को यह समझने में देर नहीं लगी कि उसके शरीर के प्रति टुन्नू के मन में कोई लोभ नहीं है। वह जिस वस्तु पर आसक्त है उसका संबंध शरीर से नहीं, आत्मा से है। उसने आज यह अनुभव किया कि आज तक उसने टुन्नू के प्रति जितनी उपेक्षा दिखाई है वह कृत्रिम थी। सच तो यह है कि हृदय के एक निभृत कोने में टुन्नू का आसन दृढ़ता से स्थापित है। फिर भी वह तथ्य स्वीकार करने के लिए प्रस्तुत नहीं थी। वह सत्यता का सामना नहीं करना चाहती थी। वह घबरा उठी; विचार की उलझन से बचने लगी। उसने चूल्हा जलाया और रसोई की व्यवस्था में जूट पड़ी। त्यों ही धोतियों का बंडल लिए फेंकू सरदार ने उसकी कोठरी में प्रवेश किया। दुलारी ने धोतियों का बंडल देख उधर से दृष्टि फेर ली। फेंकू ने बंडल उसके पैरों के पास रख दिया और कहा, ”देखो तो, कैसी बढ़िया धोतियाँ हैं।”

Question number: 254 (1 of 11 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी को क्या अनुभव हो गया था?

Question number: 255 (2 of 11 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी को क्या समझने में देर नहीं लगी थी?

Question number: 256 (3 of 11 Based on Passage) Show Passage

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इस बात पर दुलारी क्या करती थी?

Question number: 257 (4 of 11 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी का चित्त कैसा हो रहा था?

Question number: 258 (5 of 11 Based on Passage) Show Passage

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टुन्नू के आने पर दुलारी से कोई विशेष बातचीत क्यों न हो पाती?

Question number: 259 (6 of 11 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी ने इस उलझन से बचने के लिए क्या किया?

Question number: 260 (7 of 11 Based on Passage) Show Passage

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किसका बंडल लिए फेंकू सरदार ने दुलारी की कोठरी में प्रवेश किया?

Question number: 261 (8 of 11 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी ने धोतियों का बंडल देख क्या किया?

Question number: 262 (9 of 11 Based on Passage) Show Passage

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फेंकू ने क्या किया?

Explanation

फेंकू ने बंडल उसके पैरों के पास रख दिया और कहा, ”देखो तो, कैसी बढ़िया धोतियाँ हैं।”

बंडल पर ठोकर जमाते हुए दुलारी ने कहा, ”तुमने तो होली पर साड़ी देने का वादा किया था।”

”वह वादा तीज पर पूरा कर दूँगा। आजकल रोज़गार बड़ा मंदा पड़ गया है, ”… (21 more words) …

Question number: 263 (10 of 11 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी क्या मानने को तैयार नहीं थी?

Question number: 264 (11 of 11 Based on Passage) Show Passage

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टुन्नू दुलारी के सामने बैठकर क्या करता था?

Passage

मणि ने अभिभूत हो माथ नवाया-” जाने कितना ऋण है हम पर इन नदियों का, हिम शिखरों का।” ’संसार कितना सुंदर।’ स्वप्न जगाते दन लम्हों में मैने सोचा। पर तभी उदासी की एक झीनी-सी परत मुझ पर छा गई। उड़ते बादलों की तरह पत्थर तोड़ती उन पहाड़िनों का खयाल आ गया।

आत्मा की अनंत परतों को छीलता हुआ हमारा यह सफ़र थोड़ा और आगे बढ़ा कि तभी देखा-इक्की-दुक्की फ़ौजी से छावनियाँ। ध्यान आया यह बोर्डर एरिया है। थोड़ी दूरी पर चीन की सीमा है। एक फ़ौजी से मैंने कहा-”इतनी कड़कड़ाती ठंड में (उस समय तापमान माइनस 15 डिग्री सेल्यिसय था) आप लोगों को बहुत तकलीफ़ होती होगी।” वह हँस दिया- एक उदास हँसी, ”आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।”

’फेरी भेटुला’ (फिर मिलेंगे) कहते हुए जितेन ने जीप चालू कर दी। थोड़ी देर बाद ही फिर दिखी एक फ़ौज छावनी जिस पर लिखा था- ’वी गिव अवर टुडे फॉर योर टुमारो।

Question number: 265 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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फ़ौजी छावनियाँ में क्या लिखा हुआ था?

Question number: 266 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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’फेरी भेटुला’ का क्या अर्थ हैं?

Question number: 267 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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थोड़ी दूरी पर कौनसी सीमा दिखाई दी?

Question number: 268 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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मणि ने अभिभूत होकर किस पर माथा नवाया?

Passage

दुलारी के जीवन में टुन्नू का प्रवेश हुए अभी कुल छह मास हुए थे। पिछली भादों में तीज के अवसर पर दुलारी खोजवाँ बाज़ार में गाने गई थी। दुक्कड़ (यह शहनाई के साथ बजाया जाने वाला एक तबले जैसा बाजा) पर गानेवालियों में दुलारी की महती ख्याति थी। उसे पद्य में ही सवाल-जवाब करने की अद्भूत क्षमता प्राप्त थी। कजली (एक तरह का गीत या लोकगीत जो भादों की तीज में गाया जाता है।) गाने वाले बड़े-बड़े विख्यात शायरों की उससे कोर दबती (लिहाज करना) थी। इसलिए उसके मुँह पर गाने में सभी घबराते थे। उसी दुलारी को कजली-दंगल में अपनी ओर खड़ा कर खोजवाँ वालों ने अपनी जीत सुनिश्चित समझ ली थी। परंतु जब साधारण गाना हो चुकने के पर सवाल-जवाब के लिए दुक्कड़ पर चोट पड़ी और विपक्ष से सोलह-सत्रह वर्ष का एक लड़का गौनहारियों (गाने का पेशा करने वाली) की गोल में सबसे आगे खड़ी दुलारी की ओर हाथ उठाकर ललकार उठा-” ”रनियाँ लड परमेसरी लोट! ” (प्रामिसरी नोट) तब उन्हें दपनी विजय पर पूरा विश्वास न रह गया।

बालक टुन्नू बड़े जोश से गा रहा था-

”रनियाँ लड परमेसरी लोट!

दरगोड़े (पैरों से कुचलना या रौंदना।

भाव यह है कि वस्तु बहुतायत से

प्राप्त हो।) से घेवर बुँदिया

दे माथे मोती कड बिंदिया

अउर किनारी में सारी के

टाँक सोनहली गोट। रनियाँ! …. ”

Question number: 269 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

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दुक्कड़ क्या होता है?

Question number: 270 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

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गौनहारियों क्या होता है?

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