कृतिका (Kritika-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 35 - 52 of 461

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Passage

झटपट हल्दी पीसकर हमारे घावों पर थोपी गई। घर में कुहराम मच गया। हम केवल धीमे सेर से ”साँ…. स…. . साँ” कहते हुए मइयाँ के आँचल में लुके चले जाते थे। सारा शरीर थर-थर काँप रहा था। रोंगटे खड़े हो गए थे। हम आँखे खोलना चाहते थे; पर वे खुलती न थीं। हमारे काँपते हुए ओंठो को मइयाँ बार-बार निहारकर रोती और बड़े लाड़ से हमें गले लगा लेती थी।

इसी समय बाबू जी दौड़े आए। आकर झट हमें मइयाँ की गोद से अपनी गोद में लेने लगे। पर हमने मइयाँ के आँचल की- प्रेम और शांति के चँदोवे की- छाया न छोड़ी…. . ।

Question number: 35 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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पिताजी के गोद में लेने से बच्चे ने क्या नहीं छोड़ा?

Question number: 36 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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हमारे काँपते हुए शरीर को देखकर मइयाँ ने क्या किया?

Question number: 37 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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मइयाँ ने बच्चे की चोट के लिए क्या किया?

Passage

रानी एलिज़ाबेथ की जन्मपत्री भी छपी। प्रिंस फिलिप के कारनामे छपे। और तो और, उनके नौकरों, बावरचियों, खानसामों, अंगरक्षकों की पूरी की पूरी जीवनियाँ देखने में आईं। शाही महल में रहने और पलने वाले कुत्तों तक की तसवीरें अखबारों में छप गईं….

बड़ी धूम थी। बड़ा शोर-शराबा था। शंख इंग्लैंड में बज रहा था, गूँज हिंदुस्तान में आ रही थी।

Question number: 38 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

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अखबारों में किसकी तस्वीर छपी थी?

Question number: 39 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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गूँज कहांँ आ रही थी?

Question number: 40 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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कारनामे किसके छपे थे?

Question number: 41 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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शंख कहाँं बज रहा था?

Question number: 42 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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जन्मपत्री किसकी छपी थी?

Question number: 43 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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जीवनियाँ किनकी देखने में आई?

Passage

कभी -कभी हम लोग बारात का भी जुलूस निकालते थे। कनस्तर का तंबूरा बजता अमोले (आम का उगता हुआ पौधा) को घिसकर शहनाई बजायी जाती, टूटी चूहेदानी की पालकी बनती, हम समधी बनका बकरे पर चढ़ लेते और चबूतरे के एक कोने से चलकर बरात दूसरे कोन में जाकर दरवाज़े लगती थी। वहाँ काठ की पटरियों से घिरे, गोबर से लिपे, आम और केले की टहनियों से सजाए हुए छोटे आँगन में कुल्हिए का कलसा रखा रहता था। वहीं पहुँचकर बरात फिर लौट आती थी। लौटने का समय, खटोली पर लाल ओहार (परदे के लिए डाला हुआ कपड़ा) डालकर, उसमें दुलहिन को चढ़ा लिया जाता था। लौट आने पर बाबू जी ज्यों ही ओहार उघारकर दुलहिन का मुख निरखने लगते, त्यों ही हम लोग हँसकर भाग जाते।

Question number: 44 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे बारात को कैसे निकालते थे?

Explanation

बारात में कनस्तर का तंबूरा बजता, आम के उगते हुए पौधा इसे घिसकर शहनाई बजायी जाती, टूटी चुहेदानी की पालकी बनती, हम समधी बनकर बकरे में चढ़ लेते और चबूतरे के एक कोन से चलकर बरात दूसरे कोने में जाकर दरवाजे में लगती थी। बारात लौटने के समय परदे के… (60 more words) …

Question number: 45 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे किसका जुलूस निकालते थे?

Passage

जब कभी हम लोग ददरी के मेले में जानेवाले आदमियों का झुंड देख पाते, तब कूद-कूदकर चिल्लाने लगते थे-

चलो भाइयो ददरी, सतू पिसान की मोटरी।

अगर किसी दूल्हे के आगे-आगे जाती हुई ओहारदार पालकी देख पाते, तब खूब ज़ोर से चिल्लाने लगते थे-

रहरी (अरहर) में रहरी पुरान रहरी, डोला के कनिया हमार मेहरी।

Question number: 46 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे मेले में जाने के लिए चिल्लाने के लिए क्या कहते है?

Question number: 47 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे खूब ज़ोर से कब चिल्लाते है?

Question number: 48 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे कौनसे मैले में जाने के लिए चिल्लाने लगते थे?

Question number: 49 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे खूब ज़ोर से चिल्लाते हुए क्या कहते है?

Passage

मइयाँ चावल अमनिया (साफ, शुद्ध) कर रही थी। हम किसी के आँचल में छिप गए। हमें डर से काँपते देखकर वह ज़ोर से रो पड़ी और सब काम छोड़ बैठी। अधीर होकर हमारे भय का कारण पूछने लगी। कभी हमें अंग भरकर दबाती और कभी हमारे अंगों को अपने आँचल से पोंछकर हमें चूम लेती। बड़े संकट में पड़ गई।

Question number: 50 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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मइयाँ अधीर होकर क्या करने लगी?

Question number: 51 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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चावल अमनिया क्या होता है?

Question number: 52 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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भय के कारण सुनने के बाद मइयाँ ने क्या किया?

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