कृतिका (Kritika-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 273 - 290 of 461

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Passage

दुलारी के जीवन में टुन्नू का प्रवेश हुए अभी कुल छह मास हुए थे। पिछली भादों में तीज के अवसर पर दुलारी खोजवाँ बाज़ार में गाने गई थी। दुक्कड़ (यह शहनाई के साथ बजाया जाने वाला एक तबले जैसा बाजा) पर गानेवालियों में दुलारी की महती ख्याति थी। उसे पद्य में ही सवाल-जवाब करने की अद्भूत क्षमता प्राप्त थी। कजली (एक तरह का गीत या लोकगीत जो भादों की तीज में गाया जाता है।) गाने वाले बड़े-बड़े विख्यात शायरों की उससे कोर दबती (लिहाज करना) थी। इसलिए उसके मुँह पर गाने में सभी घबराते थे। उसी दुलारी को कजली-दंगल में अपनी ओर खड़ा कर खोजवाँ वालों ने अपनी जीत सुनिश्चित समझ ली थी। परंतु जब साधारण गाना हो चुकने के पर सवाल-जवाब के लिए दुक्कड़ पर चोट पड़ी और विपक्ष से सोलह-सत्रह वर्ष का एक लड़का गौनहारियों (गाने का पेशा करने वाली) की गोल में सबसे आगे खड़ी दुलारी की ओर हाथ उठाकर ललकार उठा-” ”रनियाँ लड परमेसरी लोट! ” (प्रामिसरी नोट) तब उन्हें दपनी विजय पर पूरा विश्वास न रह गया।

बालक टुन्नू बड़े जोश से गा रहा था-

”रनियाँ लड परमेसरी लोट!

दरगोड़े (पैरों से कुचलना या रौंदना।

भाव यह है कि वस्तु बहुतायत से

प्राप्त हो।) से घेवर बुँदिया

दे माथे मोती कड बिंदिया

अउर किनारी में सारी के

टाँक सोनहली गोट। रनियाँ! …. ”

Question number: 273 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

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कजली क्या होता है?

Question number: 274 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

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दुक्कड़ क्या होता है?

Question number: 275 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

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पिछली भादों पर दुलारी कहाँं गई थी?

Passage

सुनकर सब हताश हो गए और झुँझलाने लगे। मूर्तिकार ने ढाढस बँधाते हुए आगे कहा, ”सुना है कि बिहार सेक्रेटएट के सामने सन्‌ 42 में शहीद होने वाले बच्चों की मूर्तियाँ स्थापित हैं, शायद बच्चों की नाक ही फिट बैठ जाए, यह सोचकर वहाँ भी पहुँचा पर उन बच्चों की नाकें भी इससे कहीं बड़ी बैठती हैं। अब बताइए, मैं क्या करुँ? ”

……राजधानी में सब तैयारियाँ थीं। जॉर्ज पंचम की लाट को मल-मलकर नहलाया गया था। रोगन लगाया गया था। सब कुछ हो चुका था, सिर्फ़ नाक नहीं थीं

बात फिर बड़े हुक्कामों तक पहुँची। बड़ी खलबली मची-अगर जॉर्ज पंचम के नाक न लग पाई तो फिर रानी का स्वागत करने का मतलब? यह तो अपनी नाक कटाने वाली बात हुई।

Question number: 276 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

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राजधानी में क्या तैयारी हो रही थी?

Question number: 277 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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अंत में मूर्तिकार कहांँ गया?

Question number: 278 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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जॉर्ज पंचम की नाक नहीं लग पाने से क्या हुआ?

Passage

मैंने हैरान होकर देखा- आसमान जैसे उलटा पड़ा था और सारे तारे बिखरकर नीचे टिमटिमा रहे थे। दूर…. ढलान लेती तराई पर सितारों के गुच्छे रोशनियों की एक झालर सी बना रहे थे। क्या था वह? वह रात में जगमगाता हुआ गैंगटाक शहर था-इतिहास और वर्तमान के संधि-स्थल पर खड़ा मेहनतकश बादशाहों का वह एक ऐसा शहर था जिसकी सब कुछ संदर था-सुबह, शाम, रात।

Question number: 279 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दूर…. ढलान लेती तराई पर सितारों के गुच्छे क्या बना रहे थे?

Explanation

दूर…. ढलान लेती तराई पर सितारों के गुच्छे रोशनियों की एक झालर सी बना रहे थे।

क्योंकि-इन सुदंर दृश्यों में कुछ ऐसा नजर आता है कि कोई चीज़ बन रही हो।

Question number: 280 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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गैंगटाक कैसा शहर था? इसमें क्या सुंदर था?

Explanation

इतिहास और वर्तमान के संधि-स्थल पर खड़ा मेहनतकश बादशाहों का वह एक ऐसा शहर था जिसकी सुबह, शाम, रात सब कुछ सुंदर था।

क्योंकि-कोई शहर ऐसा होता है जिसका सब कुछ सुदंर होता हैं।

Question number: 281 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका ने हैरान होकर क्या देखा था?

Explanation

हैरान होकर क्या देखा था कि आसमान जैसे उलटा पड़ा था और सारे तारे बिखरकर नीचे टिमटिमा रहे थे।

क्योंकि-कभी कभी हम ऐसे सुदंर दृश्य देख लेते है जिसके बारे हमने सोचा नहीं होता हैंं।

Question number: 282 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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वह रात में जगमगाता हुआ क्या था?

Explanation

वह रात में जगमगाता हुआ गैंगटाक शहर था।

क्योंकि-ऐसे दृश्य किसी न किसी शहरों में होते हैंं व उन शहर का नाम भी होता हैं।

Passage

और तभी सहयात्री मणि और जितेन मुझे खोजते-खोजते वहाँ तक आ गए थे। मुझे गमगीन देख जितेन कहने लगा, ”मैडम, ये मेरे देश की आम जनता है, इन्हें तो आप कहीं भी देख लेंगी…आप इन्हें नहीं, पहाड़ों की सुंदरता को देखिए…. जिसके लिए आप इतने पैसे खर्च करके आई हैं।”

’ये देश की आम जनता ही नहीं, जीवन का प्रति संतुलन भी हैं। ये ’वेस्ट एट रिपेईंग’ (कम लेना और ज्यादा देना) हैं। कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती है’, मन ही मन सोचा मैंने। हम वापस जीप की ओर मुड़ने लगे कि तभी मैने देखा-वे श्रम-सुंदरियाँ किसी बात पर इस कदर खिलखिलाकर हँस पड़ी थीं कि जीवन लहरा उठा था और वह सारा खंडहर ताजमहल बन गया था।

Question number: 283 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका को वहाँ खोजते-खोजते कौन आ जाते हैं?

Question number: 284 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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जितेन ने लेखिका से क्या कहा?

Passage

जापान जाने का अवसर मिला, तब हिरोशिमा गया और वहाँ के अस्पताल भी देखा जहाँ रेडियम-पदार्थ से आहत लोग वर्षों से कष्ट पा रहे थे। इस प्रकार प्रत्यक्ष अनुभव भी हुआ-पर अनुभव से अनुभूति गहरी चीज़ है, कम-से-कम कृतिकार के लिए। अनुभव तो घटित का होता है, पर अनुभूति संवदेना और कल्पना के सहारे उस सत्य को आत्मसात्‌ कर लेती है जो वास्तव में कृतिकार के साथ घटित नहीं हुआ है। जो आँखों के सामने नहीं आया, जो घटित के अनुभव में नहीं आया, वही आत्मा के सामने ज्वलं प्रकाश में आ जाता है, तब वह अनुभूति-प्रत्यक्ष हो जाता है।

Question number: 285 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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लेखक के अनुसार अनुभूति क्या व किसके लिए है?

Question number: 286 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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लेखक ने अनुभव व अनुभूति से ज्यादा किसे अधिक महत्व दिया है?

Question number: 287 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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जापान में लेखक ने क्या-क्या देखा?

Question number: 288 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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अस्पताल में कौन कष्ट पा रहा था?

Question number: 289 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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लेखक को कहाँ जाने का अवसर मिला?

Passage

सब अखबारों ने खबरें छापी कि जॉर्ज पंचम की नाक लगाई गई है…. यानी ऐसी नाक जो कतई पत्थर की नहीं लगती।

लेकिन उस दिन के अखबारों में एक बात गौर करने की थी। उस दिन देश में कहीं भी किसी उद्घाटन की खबर नहीं थी। किसी ने कोई फीता नहीं काटा था। कोई सार्वजनिक सभा नहीं हुई थी। कहीं भी किसी का अभिनंदन नहीं हुआ था, कोई मानपत्र भेंट करने की नौबत नहीं आई थी। किसी हवाई अडडे या स्टेशन पर स्वागत-समारोह नहीं हुआ था। किसी का ताज़ा चित्र नहीं छपा गया था। सब अखबार खाली थे। पता नहीं ऐसा क्यों हुआ था? नाक तो सिर्फ़ एक चाहिए थी वह भी बुत के लिए।

Question number: 290 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

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अंत में अखबार वालों ने क्या खबर छापी थी?

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