कृतिका (Kritika-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 202 - 217 of 461

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Passage

इस सिलसिले में यह उल्लेख है कि टुन्नू का दुलारी नाम्नी मौनहारिन से भी संबंध था। कल शाम अमन सभा दव्ारा टाउन हॉल में आयोजित समारोह में भी, जिसमें जनता का एक भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था, दुलारी को नचाया-गवाया गया। उसे भी शायद टुन्नू की मृत्यु का संवाद मिल चुका था। वह बहुत उदास थी और उसने खद्दर की एक साधारण धोती-मात्र पहन रखी थी। सुना जाता है कि पुलिस जबरदस्ती ले आई थी। वह उस स्थान पर गाना नहीं चाहती जहाँ आठ घंटे पहले उसके प्रेमी की हत्या की गई थी। परंतु विवश होकर गाने के लिए खड़ा होना पड़ा। कुख्यात जमादार अली सगीर ने मौसमी चीज़ गाने की फ़रमाइश की। दुलारी ने फींकी हँसी हँसकर गाना प्रारंभ किया। उसने कुछ अजीब दर्द-भरे गले से गाया- ”एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा, कासों मैं पूछूँ? ”

Question number: 202 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

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इस सलिसिले में क्या उल्लेख हुआ है?

Question number: 203 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी ने समारोह में क्या पहन रखा था?

Question number: 204 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी को कहाँं नचाया-गवाया था?

Passage

एकाएक मेरा मानसिक चैनल बदला। मन पीछे घूम गया। इसी प्रकार एक बार पलामू और गुमला के जंगलों में देखा था… पीठ पर बच्चों को कपड़े से बाँधकर पत्तों की तलाश वन-वन डोलती आदिवासी युवतियाँ। उन युवतियों के फूले हुए पांव और पत्थर तोड़ती पहाड़िनों के हाथों में पड़े ठाठे (हाथ में पड़ने वाली गांठे या निशान), एक ही कहानी कह रहे थे कि आम ज़िंदगियों की कहानी हर जगह एक-सी है कि सारी मलाई एक तरफ़; सारे आँसू, अभाव, यातना और वंचना एक तरफ़!

Question number: 205 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका आदिवासी की कौनसी कहानी कह रहे थे?

Question number: 206 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका ने आदिवासी युवतियों को कौनसे जंगल में देखा था?

Question number: 207 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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आदिवासी युवतियाँ क्या तलाश रही थी?

Passage

’देवरा से पूछत’ कहते-कहते वह बिजली की तरह एकदम घूमी और जमादार अली सगीर की ओर देख उसने लजाने का अभिनय किया। उसकी आँखों से आँसू की बूँदे छहर उठीं, या यों कहिए कि वे पानी की कुछ बूँदे भी जा वरुणा में टुन्नू की लाश फेंकने से छिटकीं और अब दुलारी की आँखों में प्रकट हुईं। वैसा रूप पहले कभी न दिखाई पड़ा था- आँधी में भी नहीं, समुद्र में भी नहीं, मृत्यु के गंभीर आविर्भाव में भी नहीं।”

”सत्य है, परंतु छप नहीं सकता”, संपादक ने कहा।

Question number: 208 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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संपादक के अनुसार दुलारी का कौनसा रूप देखने को नहीं मिला?

Explanation

संपादक के अनुसार दुलारी का यह रूप देखने को नहीं मिला कि अभिनय के समय उसकी आँखों से आँसू की बूँदे छहर उठीं, या यों कहिए कि वे पानी की कुछ बूँदे भी जो वरूणा में टुन्नू की लाश फेंकने से छिटकीं और दुलारी की आँखों में प्रकट हुई। वैसा… (70 more words) …

Question number: 209 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी किस-किस से पूंछ रही थी? अपने खोए हुए गहने के बारे में।

Question number: 210 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी ने लजाने का अभिनय किसकी ओर घूम कर किया?

Question number: 211 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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अंत में संपादक ने क्या कहा?

Passage

परंतु दुलारी के दिल की आग अब भी भट्टी की तरह जल रही थी। पड़ोसिनों ने उसकी कोठरी में आकर वह आग बुझाने के लिए मीठे वचनों की जल-धारा गिराना आरंभ किया। फलस्वरूप वह ठंडी भी होने लगी।

दुलारी बोली, ”तुम्हीं लोग बताओ, कभी टुन्नू को यहाँ आते देखा है? ”

” यह तो आधी गंगा में खड़े होकर कह सकते हैं कि टुन्नू यहाँ कभी नहीं आता, ” झींगुर की माँ ने कहा। वह यह बात बिलकुल भूल गई थी कि उसने कुल दो घंटा पहले टुन्नू को दुलारी की कोठरी से निकलते देखा था। झींगुर की माँ की बात सुनकर अन्य स्त्रियाँ होंठो में मुसकराईं, परंतु किसी ने प्रतिवाद नहीं किया। दुलारी पुन: शांत हो चली। इतने में कंधे मे जाल डाले नौ-वर्षीय बालक झींगुर ने आँगन में प्रवेश किया और आते ही उसने ताज़ा समाचार सुनाया कि टुन्नू महाराज को गोरे सिपाहियों ने मार डाला और लाश भी उठा ले गए।

Question number: 212 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी के दिल की आग कैसी हो रही थी?

Question number: 213 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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झींगुर ने क्या समाचार सुनाया?

Question number: 214 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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झींगुर की माँ की बात सुनकर अन्य स्त्रियाँ क्या किया?

Question number: 215 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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इस उपन्यास के अनुसार दुलारी का गुस्सा शांत करने के लिए पड़ोसिनों ने क्या किया?

Passage

अखबारों में सिर्फ़ इतना छपा कि नाक का मसला हल हो गया है और राजपथ पर इंडिया गेट के पास वाली जॉर्ज पंचम की लाट पर नाक लग रही है।

नाक लगने से पहले फिर हथियारबंद पहरेदारों को तैनाती हुई। मूर्ति के आस-पास का तालाब सुखाकर साफ़ किया गया। उसकी रबाव निकाली गई और ताजा पानी डाला गया ताकि जो ज़िंदा नाक लगाई जाने वाली थी, वह सुख न पाए। इस बात की खबर जनता को पता नहीं थी। यह सब तैयारियाँ भीतर-भीतर चल रही थीं। रानी के आने का दिन नज़दीक आता जा रहा था मूर्तिकार खुद अपने बताए हल से परेशान था। ज़िंदा नाक लाने के लिए उसने कमेटी वालों से कुछ और मदद माँगी। वह उसे दी गई। लेकिन इस हिदायत के साथ कि एक खास दिन हर हालत में नाक लग जानी चाहिए।

और वह दिन आया।

जॉर्ज पंचम की नाक लग गई।

Question number: 216 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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नाक लगाने वाली बात किसको पता नहीं थी?

Question number: 217 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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जिंदा नाक लगाने से पहले क्या किया गया?

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