कृतिका (Kritika-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 185 - 202 of 461

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Passage

चित्रलिखित-सी मैं ’माया’ और ’छाया’ के इस अनूठे खेल को भर-भर आँखों देखती जा रही थी। प्रकृति जैसे मुझे सयानी (समझदार, चतूर) बनाने के लिए रहस्यों का उद्घाटन करने पर तुली हुई थी।

धीरे-धीरे धंध की चादर थोड़ी छँटी। अब वहाँ पहाड़ नहीं, दो विपरीत दिशाओं से आते छाया-पहाड़ थे और थोड़ी देर बाद ही वे छाया-पहाड़ अपने श्रेष्ठतम रूप में मेरे सामने थे। जीप थोड़ी देर रुकवा दी गई थी। मैंने गर्दन घुमाई… सब ओर जैसे जन्नत (स्वर्ग) बिखरी पड़ी थी। नज़रों के छोर तक खूबसूरती ही खूबसूरती। अपने को निरंतर दे देने की अनुभूति कराते पर्वत, झरने, फूलों, घाटियों और वादियों के दुर्लभ नजारे! वहीं कहीं लिखा था…’थिंक ग्रीन’।

Question number: 185 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » साना-साना हाथ जोड़ि

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चित्रलिखित में कौनसा खेल था?

Passage

प्रधान संवाददाता ने खीझकर कहा, ”यह जो आप पन्ने पर पन्ना अलिफ़-लैला की कहानी से रंग लाए हैं, वह कहाँ छपेगा और कौन छापेगा, इस पर भी आपने कुछ विचार किया है? आपने जो लिखा है उसका आपके सिवा कोई और भी गवाह है? आज आपकी रिपोर्ट छाप दूँ तो कल ही अखबार बंद हो जाए; संपादक जी बड़े घर पहुँचा दिए जाएँ।”

अपने संबंध में वार्ता होती सुनकर संपादक जी भी सजग हुए। उन्होंने पूछा, ”क्या बात है? ”

”यही शर्मा जी की रिपोर्टिंग पर झख रहा हूँ, और क्या? ” प्रधान संवाददाता ने कहा।

”पढ़िए”, संपादक ने आदेश दिया। प्रधान संवाददाता ने रिपोर्ट की कापी शर्मा जी की ओर बढ़ाते हुए कहा, ”लीजिए, आप ही पढ़कर सुनाइए। वह शीर्षक भी पढ़ दीजिएगा जो आपने संवाद पर लगाया है। क्या शीर्षक है? ”

”एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा”, झेंप-भरी मुद्रा में शर्मा जी ने कहा और फिर धीरे-धीरे वह रिपोर्ट पढ़ने लगे-

”कल छह अप्रैल को नेताओं की अपील पर नगर में पूर्ण हड़ताल रही, यहाँ तक कि खोंमचे वालों ने भी नगर में फेरी नहीं लगाई। सवेरे से ही जुलूसों का निकलना जारी हो गया, जो जलाने के लिए विदेशी वस्त्रों का संग्रह करता जाता था। ऐसे ही एक जुलूस के साथ नगर का प्रसिद्ध कजली-गायक टून्नू भी था। उक्त जुलूस टाउन हॉल पहुंचकर विघटित हो गया तो पुलिस के जमादार अली सगीर ने टुन्नू को जा पकड़ा और उसे गालियाँ दीं। गाली देने का प्रतिवाद करने पर जमादार ने उसे बूट की ठोकर मारी। चोट पसली में लगी। वह तिलमिलाकर ज़मीन पर गिर गया और उसके मुँह से एक चुल्लू खून निकल पड़ा। पास ही गोरे सैनिकों की गाड़ी खड़ी थी। उन्होंने टुन्नू को उठाकर गाड़ी में लाद लिया। लोगों से कहा गया कि अस्पताल को ले जा रहे हैं। परंतु हमारे संवाददाता ने गाड़ी का पीछा करके पता लगाया है कि वास्तव में टुन्नू मर गया। रात के आठ बजे टुन्नू का शव वरूणा में प्रवाहित किए जाते भी हमारे संवाददाता ने देखा है।

Question number: 186 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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नगर में नेताओं की हड़ताल कब हो रही?

Question number: 187 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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संवाददाता ने क्या पता लगाया?

Question number: 188 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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प्रधान संवाददाता ने सहकर्मी को खीझकर क्या कहा?

Question number: 189 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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रिपोर्ट में क्या लिखा हुआ था?

Question number: 190 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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टुन्नू कैसे मारा गया?

Passage

और मुर्तिकार फिर देश-दौरे पर निकल पड़ा। जॉर्ज पंचम की खोई हुई नाक का नाप उसके पास था। दिल्ली से वह बंबई पहुँचा। दादाभाई नौराजी, गोखले, तिलक, शिवाजी, कॉवसजी जहांगीर-सबकी नाकें उसने टटोलीं, नापीं, और गुजरात की ओर भागा- गांधीजी, सरदार पटेल, विटठुलभाई पटेल, महादेव देसाई की मूर्तियों को परखा और बंगाल की ओर चला- गुरूदेव रवींद्रनाथ, सुभाषचंद्र बोस, राजा राममोहन राय आदि को भी देखा, नाप -जोख की और बिहार की तरफ़ चला। बिहार होता हुआ उत्तर प्रदेश की ओर आया- चंद्रशेखर आज़ाद, बिस्मिल, मोतीलाल नेहरू, मदनमोहन मालवीय की लाटों के पास गया। घबराहट में मद्रास भी पहँुंचा, सत्यमूर्ति को भी देखा और मैसूर केरल आदि सभी प्रदेशों का दौरा करता हुआ पंजाब पहुंचा- लाला लाजपतराय और भगतसिंह की लाटों से भी सामना हुआ। आखिर दिल्ली पहुँचा और उसने अपनी मुश्किल बयान की, ”पूरे हिंदुस्तान की परिक्रमा कर आया, सब मूर्तियाँ देख आया। सबकी नाकों का नाप लिया पर जॉर्ज पंचम की इस नाक से सब बड़ी निकलीं।

Question number: 191 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

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मूर्तिकार नाक के लिए कहाँं-कहाँं गया?

Question number: 192 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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दिल्ली पहुँच कर मूर्तिकार ने क्या बयान किया?

Passage

आश्चर्य! पलभर में ब्रह्यांड में कितना कुछ घटित हो रहा था सतत प्रवाहमान झरने, नीचे वेग से बहती तिस्ता नदी। सामने उठती धुंध, ऊपर मँडराते आवारा बादल। मद्धिम-मद्धिम हवा में हिलोरे लेते प्रियुता और रूडोडेंड्रो के फूल। सब अपनी अपनी लय तान और प्रवाह में बहते हुए। चैरवेति-चैरवेति (चलते रहो, चलते रहो) । और समय के इसी सतत प्रवाह में तिनके-सा बहता हमारा वज़ूद (अस्तित्व) ।

पहली बार अहसास हुआ ’जीवन का आनंद है यही चलायमान सौंदर्य।

संपूर्णता के उन क्षणों में मन इस बिखरे सौंदर्य से इस कदर एकात्म हो रहा था कि भीतर-बाहर की रेखा मिट गई थी, आत्मा की सारी खिड़कियाँ खुलने लगी थीं…. . मैं सचमुच ईश्वर के निकट थी। सुबह सीखी प्रार्थना फिर होंठों को छूने लगी थी…… साना साना हाथ जोड़ि…. कि तभी अतींद्रिय संसार खंड-खंड हो गया! वह महाभाव सूखी टहनी-सा टूट गया।

Question number: 193 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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पलभर में ब्रह्यांड में क्या घटित हो रहा था?

Question number: 194 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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पहली बार लेखिका को क्या अहसास हुआ था?

Question number: 195 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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ईश्वर के निकट कौन था?

Question number: 196 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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कौन-सा संसार खंड-खंड हो गया था?

Question number: 197 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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तिनके से क्या बह रहा था?

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वह उछल पड़ा-”अरे, यह नेपाली बोली कहाँ से सीखी? ” अपनी भाषा के गर्व से उसकी आँखें चमक उठी, चेहरा इतराने लगा। और तभी चमत्कार की तरह हलकी-हलकी बर्फ़ एकदम महीन-महीन मोती की तरह गिरने लगी!

”तिम्रो माया सैंधै मलाई सताऊँछ” (तुम्हारा प्यार मुझे सदैव रूलाता है।) चहुँ ओर बिखरी यह बर्फ़ीली सुंदरता जितेन के मन पर भी थाप लगाने लगी थी। प्रेम की झील में तैरते हुए झूम-झूम गाने लगा था वह।

Question number: 198 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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”तिम्रो माया सैंधै मलाई सताऊँछ” क्या अर्थ है?

Question number: 199 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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जितेन को किसमें गर्व हुआ?

Question number: 200 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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वहाँ पर क्या चमत्कार हुआ?

Passage

इस सिलसिले में यह उल्लेख है कि टुन्नू का दुलारी नाम्नी मौनहारिन से भी संबंध था। कल शाम अमन सभा दव्ारा टाउन हॉल में आयोजित समारोह में भी, जिसमें जनता का एक भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था, दुलारी को नचाया-गवाया गया। उसे भी शायद टुन्नू की मृत्यु का संवाद मिल चुका था। वह बहुत उदास थी और उसने खद्दर की एक साधारण धोती-मात्र पहन रखी थी। सुना जाता है कि पुलिस जबरदस्ती ले आई थी। वह उस स्थान पर गाना नहीं चाहती जहाँ आठ घंटे पहले उसके प्रेमी की हत्या की गई थी। परंतु विवश होकर गाने के लिए खड़ा होना पड़ा। कुख्यात जमादार अली सगीर ने मौसमी चीज़ गाने की फ़रमाइश की। दुलारी ने फींकी हँसी हँसकर गाना प्रारंभ किया। उसने कुछ अजीब दर्द-भरे गले से गाया- ”एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा, कासों मैं पूछूँ? ”

Question number: 201 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कुख्यात जमादार अली सगीर ने क्या फ़रमाइश की?

Question number: 202 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी ने समारोह में क्या पहन रखा था?

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