कृतिका (Kritika-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1 - 17 of 461

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Passage

पूजा-पाठ कर चुकने के बाद वह राम-राम लिखने लगते। अपनी एक ’रामनामा बही’ पर हज़ार राम-नाम लिखकर वह उसे पाठ करने की पोथी के साथ बाँधकर रख देते। फिर पाँच सौ बार कागज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर राम-नाम लिखकर आटे की गोलियों में लपेटते और उन गोलियों को लेकर गंगा जी की ओर चल पड़ते थे।

Question number: 1 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी अपने ’रामनामा बही’में कितने बार कागज़ पर राम-नाम लिखते थे?

Question number: 2 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी राम-नाम लिखकर किसमें लपटते थें?

Question number: 3 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पिताजी क्या लिखते थे?

Question number: 4 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी उन गोलियों को लेकर कहाँ जाते थे?

Passage

जब बाबू जी रामायण का पाठ करते तब हम उनकी बगल में बैठे-बैठे आइने में अपना मुँह निहारा करते थे। जब वह हमारी ओर देखते तब हम कुछ लजाकर और मुसकराकर आइना नीचे रख देते थे। वह भी मुसकरा पड़ते थे।

Question number: 5 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी के रामायण पाठ करने में बच्चे क्या करते थे?

Question number: 6 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी के बच्चे की तरफ देखने पर बच्चे ने क्या किया?

Passage

उस समय भी हम उनके कंधे पर विराजमान रहते थे। जब वह गंगा में एक-एक आटे की गोलियाँ फेंककर मछलियों को खिलाने लगते तब भी हम उनके कंधे पर ही बैठे-बैठे हँसा करते थे। जब वह मछलियों को चारा देकर घर की लौटने लगते तब बीच रास्ते में झुके हुए पेड़ों की डालों पर हमें बिठाकर झुला झुलाते थे।

Question number: 7 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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गंगा जी जाते समय बाबू जी के कंधे में कौन विराजमान थे?

Question number: 8 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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पिता जी राम-नाम की आटे की गोलियां बनाकर कहाँं व किसे खिलाते थे?

Question number: 9 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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पिता जी बच्चें को झुला कैसे झुलाते थें?

Passage

कभी-कभी बाबू जी हमसे कुश्ती भी लड़ते। वह शिथल होकर हमारे बल को बढ़ावा देते और हम उनको पछ़ाड़ देते थे। यह उतान (पीठ के बल लेटना) पड़ जाते और हम उनकी छाती पर चढ़ जाते थे। जब हम उनकी लंबी-लंबी मूँछें उखाड़ने लगते तब वह हँसते-हँसते हमारे हाथों को मूँछों से छुड़ाकर उन्हें चूम लेते थे। फिर जब हमसे खट्टा और मीठा चुम्मा माँगते तब हम बारी-बारी कर अपना बायाँ और दाहिना गाल उनके मुँह की ओर फेर देते थे। बाएँ का खट्टा चुम्मा लेकर जब वह दाहिने का मीठा चुम्मा लेने लगते तब अपनी दाढ़ी या मूँछ हमारे कोमल गालों पर गड़ा देते थे। हम झुँझलाकर फिर उनकी मूँछे नोचने लग जाते थे। इस पर वह बनावटी रोना रोने लगते और अलग खड़े-खड़े खिल-खिलाकर हँसने लग जाते थे।

Question number: 10 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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खट्टा और मीठा चुम्मा क्या होता है?

Question number: 11 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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उतान क्या हैं?

Question number: 12 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों से कुश्ती कौन लड़ते थे?

Passage

पिता जी हमें बड़े प्यार से ’भोलानाथ’ कहकर पुकारा करते। पर असल में हमारा नाम था ’तारकेश्वरनाथ’। हम भी उनको ’बाबू जी’ कहकर पुकारा करते और माता को ’मइयाँ।

Question number: 13 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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भोलानाथ का असली नाम क्या था?

Question number: 14 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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बाबूजी प्यार से तारकेश्वरनाथ को क्या कह कर बुलाते थे?

Question number: 15 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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बच्चा माता पिता को क्या कह कर बुलाता था?

Passage

जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग (एक तरह का वाद्य यंत्र)

जहाँ बुढडों का संग, तहाँ खरचे का तंग

हमारे पिता तड़के (प्रभात, सवेरा) उठकर, निबट-नहाकर पूजा करने बैठ जाते थे। हम बचपन से ही उनके अंग लग गए थे। माता से केवल दूध पीने तक का नाता था। इसलिए पिता के साथ ही हम भी बाहर की बैठक में ही सोया करते। वह अपने साथ ही हमें भी उठाते और साथ ही नहला-धुलाकर पूजा पर बिठा लेते। हम भभूत का तिलक लगा देने के लिए उनको दिक करने लगते थे। कुछ हँसकर, कुछ झुँझलाकर और कुछ डाँटकर वह हमारे चौड़े लिलार (ललाट) में त्रिपुंड (एक प्रकार का तिलक जिसमें ललाट पर तीन आड़ी या अर्धचंद्राकार रेखाएँ बनाई जाती हैं) कर देते थे। हमारे लिलार में भभूत खूब खुलती थी। सिर में लंबी-लंबी जटाएँ थीं। भभूत रमाने से हम खासे ’बम-भोला’ बन जाते थे।

Question number: 16 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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मृदंग क्या है?

Question number: 17 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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त्रिपुंड क्या होता हैं?

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