CBSE Class-10 Hindi: Questions 1342 - 1353 of 2295

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Question number: 1342

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित रचनाओं में ओर किसका निर्वाह किया है?

Question number: 1343

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज दव्ारा रचित रचनाओं में उनकी भाषा किससे जुड़ी हुई है?

Question number: 1344

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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कवि मंगलेंश डबराल दव्ारा रचित उनकी रचनाओं मेें कौनसी योजना देखते ही बनती है?

Passage

5

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।

सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालक बधजोगू।।

बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब येहु मरनिहार भा साँचा।।

कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही।।

उतर देत छोड़ौं बिनु मारे। केवल कौसिक सील तुम्हारे।।

न त येहि काटि कुठार कठोरे। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।

गाधिसु नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।

अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

Question number: 1345 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनकर परशुराम जी ने क्या किया?

Explanation

लक्ष्मण जी के इस प्रकार के कठोर शब्दों को सुन कर परशुराम जी ने अपने भयंकर अर्थात खतरनाक फरसे को सही करके अपने हाथों में पकड़ लिया ।

क्योंकि- उपरोक्त प्रसंग में लक्ष्मण ने अपने वचनों दव्ारा परशुराम जी को बहुत अधिक क्राेधत कर दिया था जिससे परशुराम जी लक्ष्मण… (368 more words) …

Question number: 1346 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में परशुराम जी को समझाते हुए विश्वामित्र जी ने क्या कहा?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी ने परशुराम जी को समझाते हुए कहा कि लक्ष्मण जी का अपराध क्षमा कीजिए। सज्जन लोग बच्चों के गुण व अवगुण नहीं गिना करते हैं।

क्योंकि-जब किसी ज्ञानी व्यक्ति को बहुत क्रोध आता है अर्थात उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो… (378 more words) …

Question number: 1347 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र मन ही मन क्या सोचकर मुस्करा रहे थे?

Explanation

परशुराम जी के मुख से यह सब बातें सुनकर विश्वामित्र जी मन में मंद-मंद मुस्कारने लगे और मन में सोचने लगे कि मुनि को सारी जगह हरा-ही-हरा (अपनी वीरता ही) दिखाई दे रहा है। वे सब में विजयी होने के कारण राम-लक्ष्मण को भी एक सामान्य क्षत्रिय ही समझ रहे… (436 more words) …

Question number: 1348 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य क्या है?

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उपरोक्त प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य है कि इस सवांद में लक्ष्मण जी के व्यंग्य बाण व परशुराम जी के क्रोध को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है इसके साथ में इस सवांद में अलंकारों, भावों, दोहा, छंदो, ं संगीत, भाषा आदि का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है।

क्योंकि-जिससे उपरोक्त संवाद को… (372 more words) …

Question number: 1349 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में किस समय का वर्णन है?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने उस समय का वर्णन बताया है जब लक्ष्मण ने परशुराम जी के मुंह से अपने ही कार्यो की प्रशंसा सुनकर परशुराम जी को कहते हैं कि शूरवीर अपने शौर्य का परिचय केवल युद्ध-भूमि में दिखाते हैं। हर जगह वे अपनी वीरता… (392 more words) …

Question number: 1350 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी कहने पर परशुराम जी ने क्या कहा?

Explanation

परशुराम जी बोले-तीखी धार के कुल्हाड़ा और मुझ दयारहित और क्रोधी के समक्ष यह गुरु द्रोही (शिक्षक के प्रति गद्दार) उत्तर दे रहा है। इतना होते हुए भी मैं इस बिना मारे कैसे छोड़ रहा हूँ, इसलिए हे विश्वामित्र केवल तुम्हारे शील और प्रेम के कारण ही ऐसा हो रहा… (424 more words) …

Question number: 1351 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग की व्याख्या में लक्ष्मण ने परशुराम जी से क्या कहा?

Explanation

उपरोक्त प्रसंग की व्याख्या में लक्ष्मण ने परशुराम जी से कहा आप तो जैसे बार-बार आवाज लगाकर समय अर्थात मृत्यु को मेरे लिए बुला रहे हो।

क्योंकि-कभी-कभी क्रोध से युक्त ज्ञानी व्यक्ति भी अपने ज्ञान से अज्ञान हो जाता है उसे सही रास्ता दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को आगे… (383 more words) …

Question number: 1352 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव सौदर्य में कवि ने परशुराम जी के क्रोध को बहुत ही सहज स्वरूप को प्रस्तुत किया है। परशुरामजी लक्ष्मण जी के व्यंग्य शब्दों को सुनकर लक्ष्मण को मारने के लिए अपना कुल्हाड़ा उठाते हैं लेकिन विश्वामित्र जी के प्रेम के कारण ऐसा… (392 more words) …

Question number: 1353

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शिवसिंह ’सरोज’ के अनुसार देव दव्ारा रचित उनके ग्रंथों की कितनी संख्या है?

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