CBSE Class-10 Hindi: Questions 153 - 169 of 2295

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Passage

थोड़ी देर बाद फिर लड़कों की मंडली जुट जाती थी। इकट्‌ठा होते ही राय जमती कि खेती की जाए। बस, चबूतरे के छोर पर घिरनी गड़ जाती और नीचे की गली कुआँ बन जाती थी। मूँज की बटी हुई पतली रस्सी में एक चुक्कड़ बाँध गराड़ी पर चढ़ाकर लटका दिया जाता औा दो लड़के बैल बनकर ‘मोट’ खींचने लग जाते। चबूतरा खेत बनता, कंकड़ बीज और ठेंगा हल-जुआठा। बड़ी मेहनत से खेत जोते-बोए और पटाए जाते। फसल तैयार होते देर न लगती और हम हाथोंहाथ फसल काट लेते थे। काटते समय गाते थे

ऊँच नीच में बई कियार, जो उपजी सो भई हमारी।

फसल को एक जगह रखकर उसे पैरों से रौंद डालते थे। कसोरे (मिट्टी का बना छिछला कटोरा) का सूप बनाकर ओसाते और मिट्टी की दीए के तराजू पर तौलकर राशि तैयार कर देते थे। इसी बीच बाबू जी आकर पूछ बैठते थे-इस साल की खेती कैसी रही भोलानाथ?

बस, फिर क्या, हम लोग ज्यों-का त्यों खेत-खलिहान छोड़कर हँसते हुए भाग जाते थे। कैसी मौज की खेती थी।

ऐसे-ऐसे नाटक हम लोग बराबर खेला करते थे। बटोही भी कुछ देर ठिठककर हम लोगों के तमाशे देख लेते थे।

Question number: 153 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

बच्चे राशि कैसे तैयार करते थे?

Explanation

कसोरे (मिट्टी का बना छिछला कटोरा) का सूप बनाकर ओसाते और मिट्टी की दीए के तराजू पर तौलकर राशि तैयार कर देते थे।

क्योंकि-कई बच्चें खेल में ही नई चीज़ बनाते थे।

Passage

हम लोगों ने भी, बैजू के सुर-में सुर मिलाकर यही चिल्लाना शुरु किया। मूसन तिवारी ने बेतहाशा खदेड़ा हम लोग तो बस अपने-अपने घर की ओर आँधी हो चले।

जब हम लोग न मिल सके तब तिवारी जी सीधे पाठशाला में चले गए। वहाँ से हमको और बैजू को पकड़ लाने के लिए चार लड़के ’गिरफ्तारी वारंट’ लेकर छूटे। इधर ज्यों ही हम लोग घर पहुँचे, त्यों ही गुरु जी के सिपाही हम लोगों पर टूट पड़े। बैजू तो नौ-दो ग्यारह हो गया; हम पकड़ गए। फिर तो गुरु जी ने हमारी खूब खबर ली।

बाबू जी ने यह हाल सुना। वह दौड़े हुए पाठशाला में आए। गोद में उठाकर हमें पुचकारने और फुसलाने लगे। पर हम दुलारने से चुप होनेवाले लड़के नहीं थे। रोते-रोते उनका कंधा आँसुओं से तर कर दिया। वह गुरु जी की चिरौरी (दीनतापूर्वक की जाने वाली प्रार्थना, विनती) करके हमें घर ले चले। रास्ते में फिर हमारे साथी लड़कों का झुंड मिला। वे ज़ोर से नाचते और गाते थे-

माई पकाई गरर गरर पूआ, हम खाइब पूआ, ना खेलब जुआ।

Question number: 154 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे नाचते हुए कौनसा गीत गाते थे?

Question number: 155 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बैजू के इस तरह चिढ़ाने पर तिवारी जी ने क्या किया?

Question number: 156 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों के पकड़ में न आने पर तिवारी जी ने क्या किया?

Question number: 157 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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पाठशाला में क्या हुआ?

Question number: 158 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी ने यह सब सुनकर क्या किया?

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यह बात उस मसय की है जब इग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ दव्तीय मय अपने पति के हिंदुस्तान पधारने वाली थीं। अखबारों में उनकी चर्चा हो रही थी। रोज़ लंदन के अखबारों से खबरें आ रही थीं कि शाही दौरे के लिए कैसी-कैसी तैयारियाँ हो रही हैं- रानी एलिज़ाबेथ का दरज़ी परेशान था कि हिंदुस्तान, पाकिस्तान और नेपाल के दौरे पर रानी कब क्या पहनेंगी? उनका सेक्रेटरी और शायद जासूस भी उनके पहले ही इस महादव्ीप का तूफ़ानी दौरा करने वाला था। आखिर कोई मज़ाक तो था नहीं। ज़माना चूँकि नया था, फ़ौज-फाटे के साथ निकलने के दिन बीत चुके थे, इसलिए फ़ोटोग्राफ़रों की फ़ौज तैयार हो रही थी…. .

Question number: 159 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

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एलिज़ाबेथ कहाँं की रानी थी?

Question number: 160 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

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एलिज़ाबेथ रानी की चर्चा कहाँं हो रही थी?

Question number: 161 (3 of 7 Based on Passage) Show Passage

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हिंदुस्तान कौन पधारने वाली थी?

Question number: 162 (4 of 7 Based on Passage) Show Passage

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रानी एलिज़ाबेथ का दर्जी क्यों परेशान था?

Question number: 163 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

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महादव्ीप तुफानी दौरा कौन करने वाले थे?

Question number: 164 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

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किसकी फ़ौज तैयार हो रही थी?

Question number: 165 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

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रोज़ लंदन के अखबारों से कौनसी खबरें आ रही थी।

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यह कह वह थाली में दही-भात सानती और अलग-अलग तोता, मैना, कबूतर, हंस, मोर आदि के बनावटी नाम से कौर बनाकर यह कहते हुए खिलाती जाती कि जल्दी खा लो, नहीं तो उड़ जाएँगे; पर हम उन्हें इतनी जल्दी उड़ा जाते थे कि उड़ने को मौका ही नहीं मिलता था। जब हम सब बनावटी चिड़ियों को चट कर जाते थे तब बाबू जी कहने लगते-अच्छा, अब तुम ’राजा’ हो, जाओ खेलो।

Question number: 166 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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पूरा खाना खाने के बाद बाबू जी क्या कहते थें?

Question number: 167 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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इस उपन्यास में माँ अपने बच्चे को खाना कैसे खिलाती हैं?

Passage

और देखते-देखते नयी दिल्ली का कायापलट होने लगा। और करिश्मा तो यह था कि किसी ने किसी से नहीं कहा, किसी ने किसी को नहीं देखा पर सड़कें जवान हो गईं, बुढ़ापे की धूल साफ़ हो गई। इमारतों ने नाज़नीनों (कोमलांगी) की तरह श्रृंगार किया……

Question number: 168 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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इमारतों ने किस तरह श्रृंगार किया?

Question number: 169 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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दिल्ली में क्या करिश्मा हो रहा था?

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