CBSE Class-10 Hindi: Questions 107 - 124 of 2295

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

मइयाँ चावल अमनिया (साफ, शुद्ध) कर रही थी। हम किसी के आँचल में छिप गए। हमें डर से काँपते देखकर वह ज़ोर से रो पड़ी और सब काम छोड़ बैठी। अधीर होकर हमारे भय का कारण पूछने लगी। कभी हमें अंग भरकर दबाती और कभी हमारे अंगों को अपने आँचल से पोंछकर हमें चूम लेती। बड़े संकट में पड़ गई।

Question number: 107 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

चावल अमनिया क्या होता है?

Question number: 108 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मइयाँ अधीर होकर क्या करने लगी?

Question number: 109 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

भय के कारण सुनने के बाद मइयाँ ने क्या किया?

Question number: 110 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मइयाँ आँगन में क्या रही थी?

Question number: 111 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चा कहाँं जाकर छिप गया था?

Passage

थोड़ी देर में मिठाई की दुकान बढ़कार हम लोग घरौंदा बनाते थे। धूल की मेड़ दीवार बनती और तिनकों का छप्पर। दातून के खंभे, दियासलाई की पेटियों के किवाड़, घड़े के मुँहड़े की चूल्हा-चक्की, दीए की कड़ाही और बाबू जी की पूजा वाली आचमनी कलछी बनती थी। पानी के घी, धूल के पिसान और बालू की चीनी से हम लोग ज्योनार (भोज, दावत) करते थे। हमीं लोग ज्योनार करते और हमीं लोगों की ज्योनार बैठती थी। जब पंगत बैठ जाती थी तब बाबू जी भी धीरे-से आकर, पाँत के अंत में, जीमने (भोजन करना) के लिए बैठ जाते थे। उनको बैठते देखते ही हम लोग हँसकर और घरौंदा बिगाड़कर भाग चलते थे। वह भी हँसते-हँसते लोट-पोट हो जाते और कहने लगते-फिर कब भोज होगा भोलानाथ?

Question number: 112 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

मिठाई की दुकान बढ़ाकर बच्चें क्या करते थें?

Question number: 113 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

नाटक में पंगत के अंत में कौन बैठते थे?

Question number: 114 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

नाटक में बच्चे खाने के बर्तन व खाना किससे बनाते थे?

Question number: 115 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

ज्योनार किसकी बैठती है?

Question number: 116 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

ज्योनार क्या होती है?

Question number: 117 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चे बाबू जी को पंगत में बैठा देखकर क्या करते थे?

Question number: 118 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चें घरौंदा किस प्रकार बनाते थे?

Question number: 119 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

नाटक में बाबू जी बच्चों के भाग जाने पर क्या कहते थे?

Passage

तमाशे भी ऐसे-वैसे नहीं, तरह-तरह के नाटक! चबूतरे का एक कोना ही नाटक-घर बनता था। बाबू जी जिस छोटी चौकी पर बैठकर नहाते थे, वही रंगमंच बनती। उसी पर सरकंडे के खंभों पर कागज़ का चँदोआ (छोटा शमियाना) तानकर, मिठाइयों की दुकान लगाई जाती। उसमें चिलम के खोंचे पर कपड़े के थालों में ढेले के लड्डू, पत्तों की पूरी-कचौरियाँ, गीली मिट्टी की जलेबियाँ, फूटे घड़े के टुकड़ों के बताशे आदि मिठाइयाँ सजाई जातीं। ठीकरों के बटखरे और जस्ते के छोटे-छोट टुकड़ों के पैसे बनते। हमीं लोग खरीदकर और हमीं लोग दुकानदार बाबू जी भी दो-चार गोरखपुरिए पैसे खरीद लेते थे।

Question number: 120 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

नाटक घर कैसा बनता था?

Question number: 121 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

दुकानदार व खरीददार कौन होता था?

Question number: 122 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चें मिठाई की दुकान कहाँ पर लगाते थे?

Question number: 123 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चे कौन कौन सी मिठाई तमाशे या नाटक में बनाते थें?

Question number: 124 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

नाटक में पैसे किसके बनते थें?

f Page
Sign In