CBSE Class-10 Hindi: Questions 497 - 512 of 2295

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Passage

और तभी दिमाग में कौंधा कि मिल्टन ने ईव की सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा था कि शैतान भी उसे देखकर ठगा-सा रह जाता था और दूसरों का अमंगल करने की वृत्ति भूल जाता था। मैंने मणि से पूछा- ”क्या उसने पढ़ी है मिल्टन की वह कविता? ”

पर मणि उस समय किसी दूसरे ही सवाल से जूझ रही थी। वह एकाएक दाशैनिको की तरह कहने लगी, ”ये हिमशिखर जल स्तंभ हैं, पूरे एशिया के। देखों, प्रकृति भी किस नायाब ढेग से सारा इंतजाम करती है। सर्दियों में बर्फ़ के रूप में जल संग्रह कर लेती है और गर्मियों में पानी के लिए जब त्राहि-त्राहि मचती है तो ये ही बर्फ़ शिलाएँ पिघल-पिघल जलधारा बन हमारे सूखे कंठो को तरावट पहुँचाती हैं। कितनी अद्भुत व्यवस्था है जल संचय की! ”

Question number: 497 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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आगे सफर में क्या दिखा?

Passage

लेकिन एक बड़ी मुश्किल पेश थी जॉर्ज पंचम की नाक! … नयी दिल्ली में सब कुछ था, सब कुछ होता जा रहा था, सब कुछ हो जाने की उम्मीद थी पर जॉर्ज पंचम की नाक बड़ी मुसीबत थी। नयी दिल्ली में सब था…. सिर्फ़ नाक नहीं थी!

Question number: 498 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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नयी दिल्ली में क्या नहीं था?

Question number: 499 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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सबसे बड़ी मुश्किल क्या थी?

Passage

सुबह हमें यूमथांग के लिए निकल पड़ना था, पर आँख खुलते ही मैं बालकनी की तरफ़ भगी। यहाँ के लोगों ने बताया था कि मौसम साफ़ हो तो बालकनी से भी कंचनजंघा दिखाई देती है। हिमालय की तीसरी सबसे बड़ी चोटी कंचनजंघा है! पर मौसम अच्छा होने के बावजूद आसमान हलके-हलके बादलों से ढका था, पिछले वर्ष की ही तरह इस बार भी बादलों के कपाट ठाकुर जी के कपाट की तरह बंद ही रहे। कंचनजंघा न दिखनी थी, न दिखी। पर सामने ही रकम-रकम (तरह-तरह) के रंग-बिरंगे इतने सारे फूल दिखाई दिये। ऐसा लगा मानों फूलों के बाग में आ गई हूँ।

Question number: 500 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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हिमालय की तीसरी सबसे बड़ी चोटी कौनसी है?

Question number: 501 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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पिछले वर्ष की तरह किसके कपाट ठाकुर जी के कपाट की तरह बंद ही रहे?

Question number: 502 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका के अनुसार कंचनजंघा कहाँं से दिखाई पड़ती है?

Question number: 503 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका को सामने क्या दिखाई दिया व लेखिका को कैसा लगा?

Question number: 504 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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सुबह लेखिका को कहांँ जाना था?

Passage

करीब आधे रास्ते बाद धुंध छँटी और साथ ही सृष्टि और हमारे बीच फैला सन्नाटा भी हटा। नार्गे उत्साहित होकर कहने लगा, ”कटाओ हिंदुस्तान का स्विट्‌जरलैंड है।” मेरी सहेली मणि स्विट्‌जरलैंड घूम आई थी, उसने तुरंत प्रतिवाद किया- ”नहीं स्विट्‌जरलैंड भी इतनी ऊँचाई पर नहीं है और न ही इतना सुंदर।”

हम कटाओ के करीब आ रहे थे क्योंकि दूर ही बर्फ़ से ढके पहाड़ दिखने लगे थे। पास में जो पर्वत थे वे आधे हरे-काले दिख रहे थे। लग रहा था जैसे किसी ने इन पहाड़ों पर पाउडर छिड़क दिया हो। कहीं पाउडर बची रह गई हो और कहीं वह धूप में बह गई हो। नार्गे ने उत्तेजित होकर कहा-”देखिए एकदम ताज़ा बर्फ़ है, लगता है रात में गिरी है यह बर्फ़।” थोड़ा और आगे बढ़ने पर अब हमें पूरी तरह बर्फ़ से ढके पहाड़ दिख रहे थे। साबुन के झाग की तरह सब ओर गिरी हुई बर्फ़। मैं जीप की खिड़की से मुंडी निकाल-निकाल दूर-दूर तक देख रही थी…. . चाँदी से चमकते पहाड़!

एकाएक जितेन ने पूछा, ”कैसा लग रहा है? ”

मैंने जवाब दिया-”राम रोछो” (अच्छा है)

Question number: 505 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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नार्गे के उत्साहित पूर्वक कहने पर लेखिका की मित्र मणि ने क्या कहा?

Question number: 506 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कटाओ नामक स्थान में सेलानियों को क्या दिख रहा था?

Question number: 507 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका को पर्वत पर क्या दिख रहा था?

Question number: 508 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका क्या देख रही थी?

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”मेरे नगपति मेरे विशाल”-मैंने हिमालय को सलामी देनी चाही कि तभी जीप एक जगह रुकी…. खूब ऊँचाई से पूरे वेग के साथ ऊपर शिखरों के भी शिखर से गिरता फेन उगलता झरना। इसका नाम था-’सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉल’। फ्ल़ैश चमकने लगे। सभी सैलानी इन खूबसूरत लम्हों की रंगत को कैमरे में कैद करने में मशगूल (व्यस्त) थे।

आदिम युग की किसी अभिशप्त (शापित, अभियुक्त) राजकुमारी-सी मैं भी नीचे बिखरे भारी भरकम पत्थरों में बैठ झरने के संगीत के साथ ही आत्मा का संगीत सुनने लगी। थोड़ी देर बाद ही बहती जलधारा में पाँव डुबोया तो भीतर तक भीग गई। मन काव्यमय हो उठा। सत्य और सौन्दर्य को छूने लगा।

Question number: 509 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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शिखरों के भी शिखर से गिरता फेन उगलता झरना इसका नाम क्या था?

Question number: 510 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका कौनसा संगीत सुनने लगी?

Passage

”लेकिन इसे तुम मेरे पास क्यों लाए हो? ” दुलारी ने कड़े स्वर से पूछा। टुन्नू की शीर्ण वदन (कुम्हलाया हुआ मुख या उदास मुख) और भी सुख गया। उसने सुखे गले से कहा, ”मैंने बताया न कि होली का त्योहार था।…. . ” टुन्नू की बात काटते हुए दुलारी चिल्लाई, ”होली का त्योहार था तो तुम यहाँ क्यों आए? जलने के लिए क्या तुम्हें कहीं और चिता नहीं मिली जो मेरे पास दौड़े चले आए? तुम मेरे मालिक हो या बेटे हो या भाई हो? कौन हो? खैरियत चाहते हो तो अपना यह कफ़न लेकर यहाँ से सीधे चले जाओ! ” और उसने उपेक्षापूर्वक धोती टुन्नू के पैरो के पास फेंक दी। टुन्नू की काजल-लगी बड़ी-बड़ी आँखों में अपमान के कारण आँसू भर आए। उसने सिर झुकाए हुए आर्द्र कंठ से कहा, ” मैं तुमझे कुछ माँगता तो हूँ नहीं। देखो, पत्थर की देवी तक अपने भक्त दव्ारा दी गई भेंट नहीं ठुकराती, तुम तो हाड़-माँस की बनी हो”।

Question number: 511 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

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दुलारी के कड़े स्वर से पूछने पर टुन्नू का मुख कैसा हो गया था?

Question number: 512 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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दुलारी ने टुन्नू को डांटते हुए क्या कहा?

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