CBSE Class-10 Hindi: Questions 52 - 70 of 2295

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Question number: 52

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पुस्तकों का महत्व

Explanation

प्रस्तावना: - कहते हैं कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। पुस्तकें ज्ञानार्जन करके, मार्गदर्शन करने एवं परामर्श देने में विशेष भूमिका निभाती हैं। पुस्तकें मनुष्य के मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, नैतिक, चारित्रिक, व्यावसायिक एवं राजनीतिक विकास में सहायक होती हैं। पुस्तकें मनुष्य के जीवन में जीवन्तपर्यन्त तक… (1349 more words) …

Question number: 53

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मन्दिर

Explanation

प्रस्तावना: - हमारे देश के प्रत्येक गांव में एक मन्दिर होता हैं। मन्दिरों के साथ कोटि-कोटि की आस्थाएं जुड़ी होती हैं। ताकि मन्दिर में आकर सब प्रकार की मनोकामना पूरी हो सके। मन्दिर हमारे जीवन का आदर्श हैं। हमारी दिनचर्या के नियामक हैं। हमारी जीवनचर्या, ऋतुचर्या, यम-नियम के निर्धारक हैं।… (1409 more words) …

Question number: 54

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राज्यपाल

Explanation

प्रस्तावना: - वेसे तो हमारे देश में कई कार्यो के मंत्री है। जिसमें से एक राज्यपाल भी है। आज हम उनके भ्रमण व अधिकारों के बारे में जानेगें। मोदी सरकार चाहती है कि राज्यपाल अब निरंकुश तौर पर कहीं भी देश में विचरण नहीं करें। जहां भी जाएं, राष्ट्रपति के… (1650 more words) …

Question number: 55

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रक्तदान

Explanation

प्रस्तावना: - आज 14 जून को महान रक्तदान दिवस है। भारत में दान की परंपरा प्राचीन है। गो दान और कन्यादान तो आज भी घर-घर में होते हैं लेकिन पीछे हम देह दान में भी नहीं हैं। महर्षि द्धीच की यह परंपरा आज भी जारी है। बहुत पुरानी बात नहीं… (1444 more words) …

Question number: 56

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बीमारियां +

Explanation

प्रस्तावना: - एक छोटी सी बीमारी का उचित देखभाल न करने से हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। जो बाद में एक भंयकर बीमारी बन जाती हैं। आज हम कुछ बीमारियों के बारे में जानेगे कि वे शरीर में कैसे होती है। उसे जड़ से हटाने… (1866 more words) …

Question number: 57

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अमिताभ बच्चन

Explanation

प्रस्तावना: - हिन्दी सिनेमा के इतिहास में एक-से-एक कलाकार आए और गए, लेकिन केवल एक नाम ऐसा है जो बच्चा-बच्चा ही नहीं, अपितु युवा एवं बड़े बुजुर्गो की जुबान पर भी समान रूप से रहता है। वे आज भी हर वर्ग के चहते बने हुए है। उनका अभिनय का अंदाज… (1212 more words) …

Passage

पूजा-पाठ कर चुकने के बाद वह राम-राम लिखने लगते। अपनी एक ’रामनामा बही’ पर हज़ार राम-नाम लिखकर वह उसे पाठ करने की पोथी के साथ बाँधकर रख देते। फिर पाँच सौ बार कागज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर राम-नाम लिखकर आटे की गोलियों में लपेटते और उन गोलियों को लेकर गंगा जी की ओर चल पड़ते थे।

Question number: 58 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी अपने ’रामनामा बही’में कितने बार कागज़ पर राम-नाम लिखते थे?

Question number: 59 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी राम-नाम लिखकर किसमें लपटते थें?

Question number: 60 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी उन गोलियों को लेकर कहाँ जाते थे?

Question number: 61 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पिताजी क्या लिखते थे?

Passage

जब बाबू जी रामायण का पाठ करते तब हम उनकी बगल में बैठे-बैठे आइने में अपना मुँह निहारा करते थे। जब वह हमारी ओर देखते तब हम कुछ लजाकर और मुसकराकर आइना नीचे रख देते थे। वह भी मुसकरा पड़ते थे।

Question number: 62 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी के बच्चे की तरफ देखने पर बच्चे ने क्या किया?

Question number: 63 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी के रामायण पाठ करने में बच्चे क्या करते थे?

Passage

उस समय भी हम उनके कंधे पर विराजमान रहते थे। जब वह गंगा में एक-एक आटे की गोलियाँ फेंककर मछलियों को खिलाने लगते तब भी हम उनके कंधे पर ही बैठे-बैठे हँसा करते थे। जब वह मछलियों को चारा देकर घर की लौटने लगते तब बीच रास्ते में झुके हुए पेड़ों की डालों पर हमें बिठाकर झुला झुलाते थे।

Question number: 64 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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पिता जी राम-नाम की आटे की गोलियां बनाकर कहाँं व किसे खिलाते थे?

Question number: 65 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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पिता जी बच्चें को झुला कैसे झुलाते थें?

Question number: 66 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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गंगा जी जाते समय बाबू जी के कंधे में कौन विराजमान थे?

Passage

कभी-कभी बाबू जी हमसे कुश्ती भी लड़ते। वह शिथल होकर हमारे बल को बढ़ावा देते और हम उनको पछ़ाड़ देते थे। यह उतान (पीठ के बल लेटना) पड़ जाते और हम उनकी छाती पर चढ़ जाते थे। जब हम उनकी लंबी-लंबी मूँछें उखाड़ने लगते तब वह हँसते-हँसते हमारे हाथों को मूँछों से छुड़ाकर उन्हें चूम लेते थे। फिर जब हमसे खट्टा और मीठा चुम्मा माँगते तब हम बारी-बारी कर अपना बायाँ और दाहिना गाल उनके मुँह की ओर फेर देते थे। बाएँ का खट्टा चुम्मा लेकर जब वह दाहिने का मीठा चुम्मा लेने लगते तब अपनी दाढ़ी या मूँछ हमारे कोमल गालों पर गड़ा देते थे। हम झुँझलाकर फिर उनकी मूँछे नोचने लग जाते थे। इस पर वह बनावटी रोना रोने लगते और अलग खड़े-खड़े खिल-खिलाकर हँसने लग जाते थे।

Question number: 67 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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खट्टा और मीठा चुम्मा क्या होता है?

Question number: 68 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों से कुश्ती कौन लड़ते थे?

Question number: 69 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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One Liner Question▾

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उतान क्या हैं?

Passage

पिता जी हमें बड़े प्यार से ’भोलानाथ’ कहकर पुकारा करते। पर असल में हमारा नाम था ’तारकेश्वरनाथ’। हम भी उनको ’बाबू जी’ कहकर पुकारा करते और माता को ’मइयाँ।

Question number: 70 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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बाबूजी प्यार से तारकेश्वरनाथ को क्या कह कर बुलाते थे?

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