CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi: Questions 52 - 70 of 2295

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Question number: 52

» Essay Writing

Essay Question▾

Describe in Detail

पुस्तकों का महत्व

Explanation

प्रस्तावना: - कहते हैं कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। पुस्तकें ज्ञानार्जन करके, मार्गदर्शन करने एवं परामर्श देने में विशेष भूमिका निभाती हैं। पुस्तकें मनुष्य के मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, नैतिक, चारित्रिक, व्यावसायिक एवं राजनीतिक विकास में सहायक होती हैं। पुस्तकें मनुष्य के जीवन में जीवन्तपर्यन्त तक साथ देती हैं। उनक

… (8198 more words) …

Question number: 53

» Essay Writing

Essay Question▾

Describe in Detail

मन्दिर

Explanation

प्रस्तावना: - हमारे देश के प्रत्येक गांव में एक मन्दिर होता हैं। मन्दिरों के साथ कोटि-कोटि की आस्थाएं जुड़ी होती हैं। ताकि मन्दिर में आकर सब प्रकार की मनोकामना पूरी हो सके। मन्दिर हमारे जीवन का आदर्श हैं। हमारी दिनचर्या के नियामक हैं। हमारी जीवनचर्या, ऋतुचर्या, यम-नियम के निर्धारक हैं। सभी लोग राग-दव्ेष से ऊपर उठकर मन्दिर में जाते हैं। समर्पण की

… (7950 more words) …

Question number: 54

» Essay Writing

Essay Question▾

Describe in Detail

राज्यपाल

Explanation

प्रस्तावना: - वेसे तो हमारे देश में कई कार्यो के मंत्री है। जिसमें से एक राज्यपाल भी है। आज हम उनके भ्रमण व अधिकारों के बारे में जानेगें। मोदी सरकार चाहती है कि राज्यपाल अब निरंकुश तौर पर कहीं भी देश में विचरण नहीं करें। जहां भी जाएं, राष्ट्रपति के साथ गृह मुंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को बताकर जाएं। अपने गृह राज्य तो कम ही जाएं। भारतीय सं

… (9562 more words) …

Question number: 55

» Essay Writing

Essay Question▾

Describe in Detail

रक्तदान

Explanation

प्रस्तावना: - आज 14 जून को महान रक्तदान दिवस है। भारत में दान की परंपरा प्राचीन है। गो दान और कन्यादान तो आज भी घर-घर में होते हैं लेकिन पीछे हम देह दान में भी नहीं हैं। महर्षि द्धीच की यह परंपरा आज भी जारी है। बहुत पुरानी बात नहीं हैं जब नेताजी सुभाषचुद्र बोस ने कहा, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा और असंख्य भारतीयों ने अपना खून देकर भा

… (7468 more words) …

Question number: 56

» Essay Writing

Essay Question▾

Describe in Detail

बीमारियां +

Explanation

प्रस्तावना: - एक छोटी सी बीमारी का उचित देखभाल न करने से हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। जो बाद में एक भंयकर बीमारी बन जाती हैं। आज हम कुछ बीमारियों के बारे में जानेगे कि वे शरीर में कैसे होती है। उसे जड़ से हटाने के लिए क्या किया जाता हैं।

डायबिटिक रेटिनोपैथी: - डायबिटिज की वजह से होने वाली रेटिनोपैथी कामकाजी आबादी में आंखों

… (9992 more words) …

Question number: 57

» Essay Writing

Essay Question▾

Describe in Detail

अमिताभ बच्चन

Explanation

प्रस्तावना: - हिन्दी सिनेमा के इतिहास में एक-से-एक कलाकार आए और गए, लेकिन केवल एक नाम ऐसा है जो बच्चा-बच्चा ही नहीं, अपितु युवा एवं बड़े बुजुर्गो की जुबान पर भी समान रूप से रहता है। वे आज भी हर वर्ग के चहते बने हुए है। उनका अभिनय का अंदाज ही कुछ अलग तरह का है। कहने की आवश्यकता नहीं कि वह नाम अभिताभ बच्चन के अलावा और कोई नहीं हो सकता, जो दुनिया भ

… (6829 more words) …

Passage

पूजा-पाठ कर चुकने के बाद वह राम-राम लिखने लगते। अपनी एक ’रामनामा बही’ पर हज़ार राम-नाम लिखकर वह उसे पाठ करने की पोथी के साथ बाँधकर रख देते। फिर पाँच सौ बार कागज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर राम-नाम लिखकर आटे की गोलियों में लपेटते और उन गोलियों को लेकर गंगा जी की ओर चल पड़ते थे।

Question number: 58 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पिताजी क्या लिखते थे?

Question number: 59 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाबू जी राम-नाम लिखकर किसमें लपटते थें?

Question number: 60 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाबू जी अपने ’रामनामा बही’में कितने बार कागज़ पर राम-नाम लिखते थे?

Question number: 61 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाबू जी उन गोलियों को लेकर कहाँ जाते थे?

Passage

जब बाबू जी रामायण का पाठ करते तब हम उनकी बगल में बैठे-बैठे आइने में अपना मुँह निहारा करते थे। जब वह हमारी ओर देखते तब हम कुछ लजाकर और मुसकराकर आइना नीचे रख देते थे। वह भी मुसकरा पड़ते थे।

Question number: 62 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाबू जी के बच्चे की तरफ देखने पर बच्चे ने क्या किया?

Question number: 63 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बाबू जी के रामायण पाठ करने में बच्चे क्या करते थे?

Passage

उस समय भी हम उनके कंधे पर विराजमान रहते थे। जब वह गंगा में एक-एक आटे की गोलियाँ फेंककर मछलियों को खिलाने लगते तब भी हम उनके कंधे पर ही बैठे-बैठे हँसा करते थे। जब वह मछलियों को चारा देकर घर की लौटने लगते तब बीच रास्ते में झुके हुए पेड़ों की डालों पर हमें बिठाकर झुला झुलाते थे।

Question number: 64 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

पिता जी राम-नाम की आटे की गोलियां बनाकर कहाँं व किसे खिलाते थे?

Question number: 65 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

पिता जी बच्चें को झुला कैसे झुलाते थें?

Question number: 66 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

गंगा जी जाते समय बाबू जी के कंधे में कौन विराजमान थे?

Passage

कभी-कभी बाबू जी हमसे कुश्ती भी लड़ते। वह शिथल होकर हमारे बल को बढ़ावा देते और हम उनको पछ़ाड़ देते थे। यह उतान (पीठ के बल लेटना) पड़ जाते और हम उनकी छाती पर चढ़ जाते थे। जब हम उनकी लंबी-लंबी मूँछें उखाड़ने लगते तब वह हँसते-हँसते हमारे हाथों को मूँछों से छुड़ाकर उन्हें चूम लेते थे। फिर जब हमसे खट्टा और मीठा चुम्मा माँगते तब हम बारी-बारी कर अपना बायाँ और दाहिना गाल उनके मुँह की ओर फेर देते थे। बाएँ का खट्टा चुम्मा लेकर जब वह दाहिने का मीठा चुम्मा लेने लगते तब अपनी दाढ़ी या मूँछ हमारे कोमल गालों पर गड़ा देते थे। हम झुँझलाकर फिर उनकी मूँछे नोचने लग जाते थे। इस पर वह बनावटी रोना रोने लगते और अलग खड़े-खड़े खिल-खिलाकर हँसने लग जाते थे।

Question number: 67 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

बच्चों से कुश्ती कौन लड़ते थे?

Question number: 68 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

One Liner Question▾

Write in Brief

उतान क्या हैं?

Question number: 69 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

खट्टा और मीठा चुम्मा क्या होता है?

Passage

पिता जी हमें बड़े प्यार से ’भोलानाथ’ कहकर पुकारा करते। पर असल में हमारा नाम था ’तारकेश्वरनाथ’। हम भी उनको ’बाबू जी’ कहकर पुकारा करते और माता को ’मइयाँ।

Question number: 70 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » ममता का अँचल

Short Answer Question▾

Write in Short

भोलानाथ का असली नाम क्या था?

f Page
Sign In