CBSE Class-10 Hindi: Questions 1938 - 1951 of 2295

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Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

(2)

कहीं साँस लेेते हो,

घर-घर भर देते हो,

उड़ने को नभ में तुम

पर-पर कर देते हो,

आँख हटाता हूँ तो

हट नहीं रही है।

(3)

पत्तों से लदी डाल

कहीं हरी, कहीं लाल,

कहीं पड़ी है उर में

मंद-गंध- पुष्प-माल,

पाट-पाट शोभा-श्री

पट नहीं रही है।

Question number: 1938 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता हैं?

Question number: 1939

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जयशंकर प्रसाद के पिता देवी प्रसाद जी किस प्रकार के व्यक्ति थे?

Explanation

उनके पिता देवी प्रसाद जी बड़े धर्म-परायण और उदार-हृदय के व्यक्ति थे।

क्योंकि-हर व्यक्ति अपना एक स्वभाव या व्यवहार होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि… (165 more words) …

Passage

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

Question number: 1940 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि अपने जीवन के माध्यम से क्या बताना चाह रहा है?

Explanation

कहानी के माध्यम से कवि यह कह रहा है कि या तो कवि अपने जीवन में मिलने वाले धोखों को भूल जाएं या फिर दूसरों के दव्ारा दिए गए धोखे के कार्यों का वर्णन करें। कवि किस तरह से सुखी जीवन की साफ निर्मल कहानी का वर्णन करें? कवि कह… (277 more words) …

Question number: 1941 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य है कि इसमें कवि ने अपने जीवन को बहुत ही सरल बताया है लेकिन इस जीवन का कोई उपहास करे वह कवि को पसंद नहीं है। इसके साथ में कवि के अनुसार बीते हुए सुखी जीवन का उल्लेख करना कठिन होता है… (245 more words) …

Question number: 1942 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि क्या कहना चाह रहा है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में कवि कह रहा है कि कवि अपने जीवन की कहानी को एक साधारण व्यक्ति की कहानी बताता है। वह अपने सरलरूपी सीधे साधे जीवन का मजाक करवाने के पक्ष में नहीं है।

क्योंकि-कवि कहता जैसे सब लोगो के जीवन में पीड़ा व दुख… (225 more words) …

Question number: 1943 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य है कि कवि आत्मकथ्य कविता के माध्यम से कहना चाहा रहा की उसका जीवन बहुत ही सरल व अभावों से युक्त है उस जीवन का वह दूसरों के दव्ारा मजाक नहीं बनवाना चाहता हैं एवं यहां पर चांदनी रात को सुखी दिन… (246 more words) …

Question number: 1944

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नागार्जुन जी ने शिक्षा कहां से ग्रहण की है?

Explanation

उन्होंने बनारस और कोलकाता से शिक्षा ग्रहण की।

क्योंकि-कभी-कभी किसी व्यक्ति को अधिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए कहीं दूर भी जाना पड़ता हैं।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त… (184 more words) …

Question number: 1945

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Write in Short

नागार्जुन को किस बात लिए सम्मानित किया गया है?

Question number: 1946

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नागार्जुन का मूल नाम क्या था?

Explanation

उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।

क्योंकि-हर व्यक्ति का वास्तविक नाम कुंडली के अनुसार रखा जाता हैं।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया… (177 more words) …

Question number: 1947

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Describe in Detail

किस सन्‌ में उनका देहावसान हो गया?

Explanation

सन्‌ 1998 में उनका देहावसान हो गया।

क्योंकि-हर व्यक्ति की मृत्य भी इस संसार में निश्चित होती है।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित… (178 more words) …

Question number: 1948

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उनकी आरम्भिक कविताएँ किस भाषा में थी? ं

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं।

क्योंकि-शुरूआत में कवि को लिखने के लिए ब्रज भाषा ही सरल लगी थी।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली… (76 more words) …

Question number: 1949

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नागार्जुन जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं में किस पर बल दिया है?

Question number: 1950

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जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों किसको चित्रित किया है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में प्रकृति, श्रृंगार, रहस्यवाद, दर्शन, प्रेम आदि से उत्पन्न अनुभूतियों का चित्रित किया है।

क्योंकि-ताकि कवि का काव्य ओर अधिक सुदंर दिखे।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं… (82 more words) …

Question number: 1951

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नागार्जुन जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी कविताओं में किस का चित्रांकन किया है?

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