CBSE Class-10 Hindi: Questions 1790 - 1800 of 2295

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Passage

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1790 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि ने फसलों पर किस प्रकार की मिट्‌िटयों का प्रभाव बताया है?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत व्याख्या में कवि ने फसलों पर अनेक प्रकार की भूरी, काली, चंदन जैसी मिट्‌िटयों की उर्वरता व गुणवत्ता का प्रभाव बताया है।

क्योंकि-यह सब मिट्‌िटयों के गुण हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से अवतरति हैं इसके कवि नागार्जुन हैं।… (193 more words) …

Question number: 1791 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित किस कविता से उद्धृत हैं?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से उद्धृत हैं।

क्योंकि-उपरोक्त कविता कवि की बहुत ही खास कविता हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से अवतरति हैं इसके कवि नागार्जुन हैं। यहाँ कवि ने फसल की उत्पत्ति संबंधी प्रश्न के बाद… (183 more words) …

Question number: 1792 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में क्या है?

Explanation

प्रस्तुत भाव-सौंदर्य में यह है कि इसमें कवि ने बताया है कि एक फसल का निर्माण में पानी, किसानों की मेहनत, बालू के गुण, धूप, और हवा आदि के संहयोग से होता हैं। कवि का इन सबसे बहुत ही गहरा लगाव है जिसे उसने प्रस्तुत कविता के माध्यम से स्पष्ट… (240 more words) …

Question number: 1793 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार फसलों पर किसका प्रभाव होता है?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार फसल पर विभिन्न नदियों के अमृततुल्य जल का प्रभाव होता है।

क्योंकि- बिना पानी के कोई भी पौधा, जीव, जन्तु या व्यक्ति जीवित नहीं रह सकते है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से… (199 more words) …

Question number: 1794 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने कौनसे प्रश्न के बाद स्वयं ही उनके उत्तर दिए हैं?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में यहाँ कवि ने फसल की उत्पत्ति संबंधी प्रश्न के बाद स्वयं ही उनके जवाब दिए हैं।

क्योंकि- ताकि इसके उत्तर को वह सही ढंग से पहचान सके अर्थात कोई भी काम अपनेआप नहीं बनते बल्कि उनके पीछे कईयों का हाथ होता है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश… (209 more words) …

Question number: 1795 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य है कि कवि ने फसल के निर्माण के बारे में बहुत ही मार्मिक तरीका प्रस्तुत कर बताया हैं। साथ में अलंकारों, शैली, खड़ी बोली, छंदों व भाषा आदि का बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया हैं।

क्योंकि-ताकि कवि के उपर्युक्त शिल्प सौंदर्य में बहुत अधिक… (214 more words) …

Question number: 1796 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार फसल के निर्माण में क्या सहायक होती हैं?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार मनुष्य की कठोर श्रम व मेहनत के साथ -साथ प्रकृति के पंचमहाभूतों का भी फसल के निर्माण में विशेष या खास योगदान रहता है।

क्योंकि- किसी भी वस्तु के निर्माण में अनेक उपकरणों की आवश्यकता होती है। अपनेआप कोई… (215 more words) …

Question number: 1797 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश कविता फसल के कवि का क्या नाम हैं?

Explanation

कविता फसल के कवि का नागार्जुन नाम हैं।

क्योंकि- उपरोक्त नाम कवि ने किसी से प्रेरित होकर रखा हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से अवतरति हैं इसके कवि नागार्जुन हैं। यहाँ कवि ने फसल की उत्पत्ति संबंधी प्रश्न के बाद स्वयं ही उनके… (180 more words) …

Passage

(4)

उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।

सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?

क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?

सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?

अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

Question number: 1798 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने कौनसी इच्छा प्रकट की है?

Explanation

कवि ने जीवन की यादों को सहारा मान कर शांत व धैर्य भाव से दूसरों की जीवन-कहानी सुनने की इच्छा प्रस्तुत करता है।

क्योंकि-ताकि इससे कवि का मन हल्का हो सकें और कवि अपने जीवन में घटित हुए दर्द को भूल सकें।

प्रसंग- जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद… (275 more words) …

Question number: 1799 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में अपनी कथा कहने का कवि ने अभी उचित समय क्यों नहीं माना है?

Explanation

कवि ने अभी कथा सुनाने का उचित समय इसलिए नहीं माना है क्योंकि जीवन बहुत छोटा सा है और इस जीवन में दु: ख, पीड़ा और तकलीफों की कहानियाँ बहुत बढ़ी हैं। तुम मेरी सीधी-साधी जीवन की सरल कहानी सुनकर क्या करोगे? मेरी कहानी भी एक साधारण इंसान की कहानी… (344 more words) …

Question number: 1800 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य यह है कि यहां कवि कहता है मेरे जीवन की कहानी भी आम व्यक्ति जैसी है उससे अलग नहीं है इसलिए उसे बताने से कोई मतलब नहीं है। बल्कि जीवन के सत्यता को स्वीकार कर लेना ही व्यक्ति के लिए महान बात… (306 more words) …

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