CBSE Class-10 Hindi: Questions 1596 - 1606 of 2295

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Passage

फसल

एक के नहीं,

दो के नहीं,

ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म:

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1596 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई । वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से है?

Question number: 1597 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म क्यों कहा है?

Question number: 1598

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की भाषा निरन्तर किसकें के अनुसार परिवतर्तित होती रही है?

Explanation

प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परिवतर्तित होती रही है।

क्योंकि-किस विषय में कौनसी भाषा अच्छी लगेगी इसकी जानकारी कवि को थी।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली… (76 more words) …

Question number: 1599

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Describe in Detail

भाई व माता जी का स्वर्गवास हो जाने के बाद जयशंकर प्रसाद जी ने किस तरह से काम किया?

Explanation

ऐसी स्थिति में उन्होंने साहस से काम कर संघर्ष पूर्वक सामना किया।

क्योंकि-हर इंसान को मृत्यु की सत्यता स्वीकार कर आगे हिम्मतकर धैर्यपूर्वक काम करना होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ… (171 more words) …

Question number: 1600

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जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में किस शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में प्रतीकात्मक एवं लाक्षणिक शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है।

क्योंकि-ताकि उनका काव्य अनोखे रूप में पाठक को दिखे।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद… (79 more words) …

Question number: 1601

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जयशंकर प्रसाद जी को हम कवि के रूप में क्या कह सकते हैं?

Explanation

प्रसाद जी को हम कवि के रूप में युग प्रवर्तक कह सकते हैं।

क्योंकि-उन्होंने हिंदी साहित्य को इस युग में नई पहचान दी है।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने… (52 more words) …

Passage

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1602 (1 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार साहित्यकार किन की रचनाओं के माध्यम से लोगों को क्या प्रेरित करें?

Explanation

साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को इस प्रकार से प्रेरित करें कि संसार में विचारों की मतभेदों व अनभन से होने वाली क्रांतियों (लड़ाई) का वातावरण शांत हो जाए।

क्योंकि-ताकि संसार के सभी लोग सुखपूर्वक रह सके।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने… (203 more words) …

Question number: 1603 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादल को क्या बताया है?

Explanation

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है।

क्योंकि-बादल लोगों के मन एक जोश भर देता है।

प्रसंग-… (213 more words) …

Question number: 1604 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य यह है कि कवि इस कविता के माध्यम से बादल को बहुत ही बैचेन होकर बुलाता है ताकि वे बादल हर तरफ से आकर इस पृथ्वी में बरसकर पृथ्वी के हर इंसान को जल से राहत पहुंचाकर वहां की गर्मी दूर… (249 more words) …

Question number: 1605 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के संपूर्ण मानव-समुदाय में बदलाव के कारण कैसा वातावरण बना हुआ था?

Explanation

मनुष्य-समुदाय अर्थात प्राणियों में परिवर्तन के परिणामस्वरूप बैचनी और अनमनी परिस्थितियों का माहौल बना हुआ था।

क्योंकि-गर्मी के कारण पृथ्वी का हर इंसान बैचेन है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के… (189 more words) …

Question number: 1606 (5 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार कवि का क्या उद्देश्य है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार कवि का यह उद्देश्य है कि विश्व में होने वाली सामाजिक क्रांतियों से बैचेन और अनमने लोगों को दिलासा देना ही साहित्यकार का उद्देश्य होता है।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन में कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है तभी वह अपनी मंजिल तक पहुँच पाता है।… (214 more words) …

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