CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi: Questions 1594 - 1605 of 2295

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Passage

फसल

एक के नहीं,

दो के नहीं,

ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म:

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1594 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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कवि के अनुसार फसल क्या है?

Question number: 1595 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई । वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से है?

Question number: 1596 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म क्यों कहा है?

Question number: 1597 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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फसल को हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

Question number: 1598

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की भाषा निरन्तर किसकें के अनुसार परिवतर्तित होती रही है?

Explanation

प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परिवतर्तित होती रही है।

क्योंकि-किस विषय में कौनसी भाषा अच्छी लगेगी इसकी जानकारी कवि को थी।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में लिखना आरम्भ किया। प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परि

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Question number: 1599

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Describe in Detail

भाई व माता जी का स्वर्गवास हो जाने के बाद जयशंकर प्रसाद जी ने किस तरह से काम किया?

Explanation

ऐसी स्थिति में उन्होंने साहस से काम कर संघर्ष पूर्वक सामना किया।

क्योंकि-हर इंसान को मृत्यु की सत्यता स्वीकार कर आगे हिम्मतकर धैर्यपूर्वक काम करना होता हैं।

“छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि युग-युग से चली आ र

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Question number: 1600

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में किस शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में प्रतीकात्मक एवं लाक्षणिक शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है।

क्योंकि-ताकि उनका काव्य अनोखे रूप में पाठक को दिखे।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में लिखना आरम्भ किया। प्रसाद जी की भाष

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Question number: 1601

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी को हम कवि के रूप में क्या कह सकते हैं?

Explanation

प्रसाद जी को हम कवि के रूप में युग प्रवर्तक कह सकते हैं।

क्योंकि-उन्होंने हिंदी साहित्य को इस युग में नई पहचान दी है।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने नाटक और कविता के क्षेत्र की तरह ही कहानी क्षेत्र में भी य

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Passage

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1602 (1 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के सभी लोग केसे हो रहे थे।

Explanation

संसार के सभी लोग गर्मी के कारण बैचेन और अनमने हो रहे थे।

क्योंकि-कवि के अनुसार उस संसार में अत्यधिक गर्मी है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है। निराला जी कहना है कि-

व्याख्या- संसा

… (1246 more words) …

Question number: 1603 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य यह है कि कवि इस कविता के माध्यम से बादल को बहुत ही बैचेन होकर बुलाता है ताकि वे बादल हर तरफ से आकर इस पृथ्वी में बरसकर पृथ्वी के हर इंसान को जल से राहत पहुंचाकर वहां की गर्मी दूर कर सके। साथ ही संसार में होने वाली क्रांति से पेरशान और सहमें लोगों को दिलासा देना ही इस साहित्कार का मकसद है।

… (1581 more words) …

Question number: 1604 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादल को क्या बताया है?

Explanation

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है।

क्योंकि-बादल लोगों के मन एक जोश भर देता है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्

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Question number: 1605 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के संपूर्ण मानव-समुदाय में बदलाव के कारण कैसा वातावरण बना हुआ था?

Explanation

मनुष्य-समुदाय अर्थात प्राणियों में परिवर्तन के परिणामस्वरूप बैचनी और अनमनी परिस्थितियों का माहौल बना हुआ था।

क्योंकि-गर्मी के कारण पृथ्वी का हर इंसान बैचेन है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने

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