CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi: Questions 1603 - 1613 of 2295

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Passage

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1603 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार कवि का क्या उद्देश्य है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार कवि का यह उद्देश्य है कि विश्व में होने वाली सामाजिक क्रांतियों से बैचेन और अनमने लोगों को दिलासा देना ही साहित्यकार का उद्देश्य होता है।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन में कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है तभी वह अपनी मंजिल तक पहुँच पाता है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और

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Question number: 1604 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य यह है इसमें कवि ने लोगों के जीवन को व्यापक व समग्र दोनों रूप में देखकर उसकों प्रस्तुत किया हैं। उसमें अलकांरों, शैली, भाषा, छंद व स्वर का बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया है।

क्योंकि-उपरोक्त प्रंसग का शिल्प-सौंदर्य बहुत ही अनोखा नज़र आए।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना

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Question number: 1605 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के सभी लोग केसे हो रहे थे।

Explanation

संसार के सभी लोग गर्मी के कारण बैचेन और अनमने हो रहे थे।

क्योंकि-कवि के अनुसार उस संसार में अत्यधिक गर्मी है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है। निराला जी कहना है कि-

व्याख्या- संसा

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Question number: 1606 (5 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादलों को कहाँ पर आने के लिए छा जाने को कह रहा है?

Explanation

हे बादल! तुम तेज ध्वनि करते हुए आकाश में मंडरा जाओ अर्थात कवि बादलों को घोर गर्जना करते हुए आकाश मण्डल में छा जाने को कह रहा है।

क्योंकि-ताकि वह रिमझिम बरसात करके पृथ्वी वासियों की गर्मी की तपन को शीतलता प्रदान कर सके।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लि

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Question number: 1607 (6 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के संपूर्ण मानव-समुदाय में बदलाव के कारण कैसा वातावरण बना हुआ था?

Explanation

मनुष्य-समुदाय अर्थात प्राणियों में परिवर्तन के परिणामस्वरूप बैचनी और अनमनी परिस्थितियों का माहौल बना हुआ था।

क्योंकि-गर्मी के कारण पृथ्वी का हर इंसान बैचेन है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने

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Question number: 1608 (7 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार किसके द्वारा ही समाज में चेतना का भाव आने का भरोसा बना है?

Explanation

साहित्य के माध्यम से ही समाज में जागृत का भाव आने का भरोसा बना है।

क्योंकि-किसी न किसी के माध्यम से समाज को जाग्रत करना जरूरी होता है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है। निराला जी क

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Question number: 1609 (8 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने जीवन को किन रूपों में देखा है?

Explanation

कवि ने जीवन को व्यापक और समग्र दोनों रूपों में देखा है।

क्योंकि-जीवन में दुख व सुख दोनों ही रूप होते है जिनकी कारण से जीवन चलता है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है। निराला जी कहना

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Question number: 1610 (9 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य यह है कि कवि इस कविता के माध्यम से बादल को बहुत ही बैचेन होकर बुलाता है ताकि वे बादल हर तरफ से आकर इस पृथ्वी में बरसकर पृथ्वी के हर इंसान को जल से राहत पहुंचाकर वहां की गर्मी दूर कर सके। साथ ही संसार में होने वाली क्रांति से पेरशान और सहमें लोगों को दिलासा देना ही इस साहित्कार का मकसद है।

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Question number: 1611 (10 of 10 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादल को क्या बताया है?

Explanation

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है।

क्योंकि-बादल लोगों के मन एक जोश भर देता है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्

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Question number: 1612

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित काव्यों ग्रन्थों के नाम क्या-क्या है?

Explanation

उनके दव्ारा रचित काव्यों ग्रन्थों के नाम निम्न है-कानून कुसुम, चित्राधार, झरना, आँसू, लहर, महाराणा का महत्त्व, कामायनी।

क्योंकि-कवि के काव्य की गिनती के साथ उनके नाम भी मिल जाते हैं।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कुल 27 कृतियों की रचना की हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं-

काव्य ग्रन्थ-का

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Question number: 1613

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की किस उम्र में उनकी माता व भाई की मृत्यु हो गई है?

Explanation

जब वे 15 वर्ष के थे तब उनकी माताजी का और 17 वर्ष की आयु में बड़े भाई स्वर्गवास हो गया।

क्योंकि-हर व्यक्ति की मृत्यु भी भगवान के दव्ारा तय होती हैं।

“छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि युग-युग से चली आ रही प्राची

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