CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi: Questions 1596 - 1607 of 2295

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Passage

फसल

एक के नहीं,

दो के नहीं,

ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म:

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1596 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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कवि के अनुसार फसल क्या है?

Question number: 1597 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई । वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से है?

Question number: 1598

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

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जयशंकर प्रसाद जी की भाषा निरन्तर किसकें के अनुसार परिवतर्तित होती रही है?

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… (812 more words) …

Question number: 1599

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भाई व माता जी का स्वर्गवास हो जाने के बाद जयशंकर प्रसाद जी ने किस तरह से काम किया?

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… (1277 more words) …

Question number: 1600

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जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में किस शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है?

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… (857 more words) …

Question number: 1601

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जयशंकर प्रसाद जी को हम कवि के रूप में क्या कह सकते हैं?

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… (664 more words) …

Passage

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1602 (1 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार कवि का क्या उद्देश्य है?

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… (1434 more words) …

Question number: 1603 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादलों को कहाँ पर आने के लिए छा जाने को कह रहा है?

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… (1374 more words) …

Question number: 1604 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

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… (1437 more words) …

Question number: 1605 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के संपूर्ण मानव-समुदाय में बदलाव के कारण कैसा वातावरण बना हुआ था?

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… (1327 more words) …

Question number: 1606 (5 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के सभी लोग केसे हो रहे थे।

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… (1249 more words) …

Question number: 1607 (6 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

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… (1581 more words) …

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