CBSE Class-10 Hindi: Questions 1590 - 1600 of 2295

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Passage

संगतकार

(1)

मुख्य गायक के चट्‌टान जैसे भारी स्वर का साथ देती

वह आवाज सुंदर कमज़ोर कांपती हुई थी

वह मुख्य गायका का छोटा भाई है

या उसका शिष्य

या पैदल चलकर सीखने आने वाले दूर कोई रिश्तेदार

मुख्य गायक की गरज़ में

वह अपनी गूंज मिलाता आया है प्राचीन काल से

गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में

खो चुका होता है

या अपने ही सरगम को लांघकर

चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में

तब संगतकार ही स्थायी को संभाले रहता है

जैसे समेटता हो मुख्य गाायक का पीछे छूटा

हुआ सामान

जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन

जब वह नौसिखिया था

(2)

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला

प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ

तभी मुख्य गायक को ढाँढस बंधाता

कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग

और उसकी आवाज़ में जो हिचक साफ़ सुनाई देती है

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

Question number: 1590 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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Write in Short

प्रश्न कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुँच पाए-

सप्तक किसे कहते है?

Question number: 1591

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उपर्युक्त बातों के अलावा नागार्जुन जी ने अपने दव्ारा रचित रचनाओं में ओर किसकों महत्व दिया है?

Question number: 1592

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी मृत्यु किस सन्‌ में व कितने वर्ष की आयु में हुई?

Explanation

उनकी मृत्यु 15 नवम्बर, 1937 को 48 वर्ष की अल्पायु में ही यह अमर कथाकार इस दुनिया से विदा हो गया।

क्योंकि-हर व्यक्ति के जीवन व मृत्यु की डोर भगवान के हाथों में होती है। अंतर इतना होता है कि कोई देर से मरता है कोई जल्दी मरता हैं।

”छायावाद… (193 more words) …

Question number: 1593

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उपन्यास कितने व उनके नाम क्या-क्या है?

Explanation

उनके दव्ारा रचित उपन्यास तीन है व उनके नाम निम्नलिखत है- कंकाल, तितली, इरावती (अधूरा)

क्योंकि- कवि ने एक से अधिक अपनी कृतियाँ लिखी है जैसे उपन्यास, नाटक आदि।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कुल 27 कृतियों की रचना की हैं। उनकी… (44 more words) …

Passage

फसल

एक के नहीं,

दो के नहीं,

ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म:

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1594 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई । वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से है?

Question number: 1595 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म क्यों कहा है?

Question number: 1596 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

कवि के अनुसार फसल क्या है?

Question number: 1597 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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फसल को हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

Question number: 1598

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की भाषा निरन्तर किसकें के अनुसार परिवतर्तित होती रही है?

Explanation

प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परिवतर्तित होती रही है।

क्योंकि-किस विषय में कौनसी भाषा अच्छी लगेगी इसकी जानकारी कवि को थी।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली… (76 more words) …

Question number: 1599

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Describe in Detail

भाई व माता जी का स्वर्गवास हो जाने के बाद जयशंकर प्रसाद जी ने किस तरह से काम किया?

Explanation

ऐसी स्थिति में उन्होंने साहस से काम कर संघर्ष पूर्वक सामना किया।

क्योंकि-हर इंसान को मृत्यु की सत्यता स्वीकार कर आगे हिम्मतकर धैर्यपूर्वक काम करना होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ… (171 more words) …

Question number: 1600

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में किस शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में प्रतीकात्मक एवं लाक्षणिक शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है।

क्योंकि-ताकि उनका काव्य अनोखे रूप में पाठक को दिखे।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद… (79 more words) …

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