CBSE Class-10 Hindi: Questions 1499 - 1511 of 2295

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Question number: 1499

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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ऋतुराज जी दव्ारा रचित कविताओं का केंद्रीय भाव किन मुद्दों पर आधारित रहा है?

Question number: 1500

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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मंगलेश डबराल जी का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Passage

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

Question number: 1501 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने किसका वर्णन किया है?

Question number: 1502 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Question number: 1503 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कमल की कली रूपी नायिका किस प्रकार झूम रही है?

Question number: 1504 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या है?

Question number: 1505

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि देव कौनसे सम्पन्न कवि थे?

Passage

(4)

हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।

समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।

इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।

बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए।

ऊधौं भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।

अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।

ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।

राज धरम तौ यहै ’सूर’, जो प्रजा न जाहिं सताए।।

Question number: 1506 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

उपर्युक्त पद के सूरदास दव्ारा रचित शिल्प-सौंदर्य है कि इस पद में भाषा, शब्द, भाव गायक, संगीत, अलंकार, लोकोक्ति आदि का बहुत ही अच्छे ढंग से प्रयोग किया गया है इसके साथ में इन पदों के बीच-बीच में व्यंग्य का भी बेहतर तरीके से प्रयोग किया हैं।

क्योंकि-ताकि सूरदास दव्ारा… (477 more words) …

Question number: 1507 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद में उद्धव गोपियों को कौनसा ज्ञान देते हैं?

Explanation

उपर्युक्त पद में उद्धव गोपियों को निर्गुण-उपासना का ज्ञान देते हैं।

क्योंकि-ताकि गोपियां कृष्ण के प्रेम को भूल जाए।

प्रसंग- प्रस्तुत पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित ’सूरसागर’ के अन्तर्गत ’भ्रमरगीत’ में ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड से उद्धृत है। उद्धृव गोपियों को जब यह योग ज्ञान का संदेश देते है तब… (437 more words) …

Question number: 1508 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के भाव-सौंदर्य में गोपियों का भाव कैसे प्रकट हो रहा हैं?

Explanation

उपर्युक्त पद सूरदास दव्ारा रचित भाव-सौंदर्य में गोपियों का यह भाव इस प्रकार प्रकट हुआ है कि जब कृष्ण उद्धव के माध्यम से उन्हें योग ज्ञान का संदेश भेजते है तो गोपियाँ बहुत अधिक दुखी हो जाती है वे कहती की इस प्रकार का संदेश भेजने से उनके मन को… (533 more words) …

Question number: 1509 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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उद्धव दव्ारा निर्गुण-उपासना का ज्ञान देने पर गोपियों को कैसा लगता हैं?

Explanation

गोपियों को यह योग-संदेश कृष्ण दृवारा किया गया बहुत बड़ा अत्याचार और अन्याय लगता है। वे कृष्ण को राजनीति में निपूर्ण बताती हैं, जो कृष्ण को इस प्रकार की राजनीति शोभा नहीं देती है गोपियों को ऐसा लगता हैं।

क्योंकि-कोई कोई ज्ञान ऐसा होता है जो हमें अन्दर तक हिलाकर… (483 more words) …

Question number: 1510

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी दव्ारा रचित रचनाओं में उनके द्वारा किया गया अंलकारों का प्रयोग भी क्या बन पड़ा है?

Question number: 1511

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव ने अपने दव्ारा रचित काव्यों में किन शब्दों का भी प्रचूर मात्रा में प्रयोग किया है?

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