CBSE Class-10 Hindi: Questions 1484 - 1494 of 2295

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

Question number: 1484 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

Short Answer Question▾

Write in Short

देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले वस्त्र कैसे लग रहे है?

Question number: 1485 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

Short Answer Question▾

Write in Short

प्रस्तुत पद्यांश किस कवि द्वारा रचित है?

Question number: 1486 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

Short Answer Question▾

Write in Short

देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में बाल कृष्ण के पैरों में पायल के घूँघरू कैसी आवाज़ में बज रहेे हैं।

Question number: 1487 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

Short Answer Question▾

Write in Short

देव जी दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश में उनके मुख रूपी चाँद पर हँसी की चाँदनी कैसी लग रही है।

Question number: 1488 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

Short Answer Question▾

Write in Short

देव जी दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश में कृष्ण जी की आँखे कैसी है?

Question number: 1489

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

Short Answer Question▾

Write in Short

माथुर जी कौनसे युग के कवि है?

Question number: 1490

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Short Answer Question▾

Write in Short

तुलसीदास जी को बचपन में किस नाम से जाना जाता था?

Passage

(2)

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला

प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ

तभी मुख्य गायक को ढाँढस बंधाता

कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग

और उसकी आवाज़ में जो हिचक साफ़ सुनाई देती है

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

Question number: 1491 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में मुख्य गायक का साथ संगतकार कब देता है?

Question number: 1492 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में मुख्य गायक को सांत्वना देने के लिए संगतकार का स्वर कौनसी दिशा से आता है?

Question number: 1493 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में संगतकार ने किस काम का प्रयास नहीं किया है?

Question number: 1494 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Sign In