CBSE Class-10 Hindi: Questions 1411 - 1423 of 2295

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Question number: 1411

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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कवि मंगलेंश डबराल दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं मेें ओर किस भाषा को अपनाया है?

Question number: 1412

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी अपनी रचनाओं मेें प्रकृति-चित्रण के अतिरिक्त ओर क्या किया है?

Question number: 1413

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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हिन्दी साहित्य के अनेकानेक भक्त कवियों में किसका स्थान सर्वोपरी हैं?

Passage

पद

(1)

ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।

अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।

पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।

ज्यौं जल माहं तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।

प्रीति-नदी मैं पाउं न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।

’सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी।।

Question number: 1414 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद में ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड में से उपखण्ड किससे अवतरित हैं?

Explanation

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद में ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड में से उपखण्ड ’भ्रमरगीत’ नामक उपखण्ड से अवतरित हैं।

क्योंकि- जब कोई भक्त कवि अपने पदों के खंड करके वर्णन करता है तो उस खंड का नाम अवश्य रखता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद कवि सूरदास द्वारा रचित ’सूरसागर’ में ’उद्धव… (407 more words) …

Question number: 1415 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास जी के दव्ारा रचित प्रस्तुत पद के शिल्प-सौंदर्य कौन-कौन से हैं?

Explanation

उपर्युक्त पद के अनुसार सूरदास जी के दव्ारा रचित शिल्प-सौंदर्य में कवि ने विभिन्न प्रकार के अलंकार का प्रयोग कर अपने शिल्प-सौंदर्य में एक जान डाल दी है इसके अलावा भाषा, गायक, संगीत व भाव का सुंदर समावेश कर उपरोक्त शिल्प-सौंदर्य को ओर अधिक सुंदर बना दिया है।

क्योंकि-ताकि कवि… (429 more words) …

Question number: 1416 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के सूरसागर में से कौनसा खण्ड हैं?

Explanation

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के सूरसागर में से ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड हैं।

क्योंकि-जब कोई भक्त कवि अपने पद लिखते है तो उसमें वे अलग-अलग खंड बनातें है ताकि किसी को पढ़ने में दिकक्त न हो।

प्रसंग- प्रस्तुत पद कवि सूरदास द्वारा रचित ’सूरसागर’ में ’उद्धव संदेश’ खण्ड के… (404 more words) …

Question number: 1417 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास जी के दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

प्रस्तुत पद में गोपियाँ उद्धव के प्रेम का मजाक उड़ाती है कि वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से दूर हैं। क्योंकि उद्धव तो हमेशा ही कृष्ण के पास रहते है फिर भी वे कृष्ण के आकर्षण के प्रेम में नहीं पड़ सके। अर्थात प्रेम रूपी सागर के… (464 more words) …

Question number: 1418

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज अपने आस-पास किन घटनाओं को बहुत बारिकी से देखते हैं?

Question number: 1419

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज जी को कौन-कौन से विशिष्ट पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है?

Question number: 1420

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी नेे अपनी रचनाओं में किन भाषाओं के भी प्रचलित शब्दों को अपनाया है।

Question number: 1421

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास जी को किस रस का सम्राट माना जाता हैं?

Question number: 1422

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी दव्ारा रचित कविताएं क्या प्रकट करती है?

Passage

(4)

कौसिक सुनहु मंद येहु बालकु। कुटिलु कालबस निज कुल घालकु।।

भानुबंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुसु अबुधु असंकू।।

कालकवलु होइहि छन माहीं। कहौं पुकारि खोरि माहि नाहीं।।

तुम्ह हटकहु जौ चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।

लखन कहेउ मुनि सुजसु तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा।।

अपने मुहु तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी।।

नहि संतोषु त पुनि कछु कहहु। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहु।।

बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।

सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।

बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।

Question number: 1423 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में परशुराम जी विश्वामित्र जी को संबोधित करते हुए क्या कहते हैं?

Explanation

हे विश्वामित्र! सुनो, यह बच्चा बड़ा ही बुदव्हीन अर्थात मंदबुद्धि है। यह नालायक है समय के वशिभूत होकर अपने खानदान का खतरा बन रहा हैं यह सूर्यवंश रूपी चंद्र के लिए कलंक अर्थात दाग है। यह बहुत ही जिद्दी, शैतान, मूर्ख और निडर है। यह अभी एकपल में ही काल… (426 more words) …

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